ईडी ने KPSC के निलंबित अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस साहूकर और सदस्य बीवी गीता को भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया।
बेंगलुरु (कर्नाटक) [भारत]: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) के निलंबित अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस साहूकर और आयोग की सदस्य बीवी गीता को कर्नाटक में पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती परीक्षा के अंतिम चयन में कथित तौर पर हुई गंभीर अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
फ्लैटों पर तलाशी के बाद हुई गिरफ्तारी
उन्होंने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के बेंगलुरु क्षेत्रीय कार्यालय ने उनके फ्लैटों पर तलाशी अभियान चलाने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया। साहूकर और गीता दोनों को आज विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया जाएगा। यह कार्रवाई एजेंसी द्वारा 17 सितंबर को बसवराज कन्नाले और 18 सितंबर को केपीएससी के तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक आईएएस ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार की गिरफ्तारी के कुछ दिनों बाद हुई है। इन दोनों पर पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती परीक्षा के प्रश्न पत्र को लीक करने में कथित भूमिका निभाने का आरोप है, जिसके बदले में उन्होंने प्रत्येक उम्मीदवार से 30 लाख रुपये से 40 लाख रुपये तक की अवैध रिश्वत ली थी। ईडी के अनुसार, विशेष पीएमएलए अदालत ने दोनों को 14 दिनों के लिए ईडी की हिरासत में भेज दिया है।
21 ठिकानों पर ईडी ने की थी छापेमारी
18 अगस्त को, ईडी ने इस मामले के सिलसिले में कर्नाटक और गुजरात के 21 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया था। ये 21 परिसर कर्नाटक के बेंगलुरु, हसन, चित्रदुर्ग, दावनगेरे, रायचूर, कारवार, कालाबुरागी, बेलगावी और अहमदाबाद में फैले हुए थे। तलाशी अभियान में केपीएससी कार्यालय परिसर, निलंबित केपीएससी अध्यक्ष साहूकर का आवास, केपीएससी सदस्य शांता होसमानी, बिचौलिए, एड्यूटेस्ट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड (परीक्षा पत्रों के डिजिटल मूल्यांकन के लिए जिम्मेदार संस्था) का कार्यालय और पशु चिकित्सा अधिकारी पद के लिए चयनित उम्मीदवारों के परिसर शामिल थे।
चार एफआईआर के बाद शुरू हुई जांच
ईडी ने बताया कि बेंगलुरु के विधान सौधा पुलिस स्टेशन में पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती परीक्षा के अंतिम चयन में गंभीर अनियमितताओं के आरोप में दर्ज चार प्रथम सूचना रिपोर्टों (एफआईआर) के बाद उसने मामले की जांच शुरू की। एजेंसी के अनुसार, कुछ बिचौलियों ने शिकायतकर्ता सहित उम्मीदवारों को फोन करके उनके चयन के लिए प्रति उम्मीदवार 70 लाख रुपये से 80 लाख रुपये तक की रिश्वत की मांग की थी। अपने दावे को पुष्ट करने के लिए, ईडी ने कहा कि शिकायतकर्ता ने इन बिचौलियों की कुछ ऑडियो रिकॉर्डिंग कानून प्रवर्तन एजेंसियों (एलईए) को सौंपी हैं।
ओएमआर शीट में छेड़छाड़ के भी आरोप
इसके अलावा, एजेंसी के अधिकारियों ने बताया कि पेपर लीक, ओएमआर उत्तर पुस्तिका में छेड़छाड़ और केपीएससी अधिकारियों के रिश्तेदारों के अंतिम चयन में सहायता करने के आरोप भी एलईए के समक्ष दर्ज शिकायतों का हिस्सा हैं।
(एएनआई)
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