सीएम योगी ने गोरखपुर में आईएमए के चैरिटेबल ब्लड सेंटर का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि इंसेफेलाइटिस की चिंता अब खत्म हो चुकी है और यूपी में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 85 हो गई है।
गोरखपुर (उत्तर प्रदेश)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि साढ़े नौ वर्ष पहले पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस से तड़पते बच्चों और दम तोड़ते बचपन को देखकर हर जागरूक माता-पिता चिंतित रहते थे, लेकिन अब वह चिंता पूरी तरह खत्म हो चुकी है। उन्होंने कहा कि माफिया और मच्छर की तरह इंसेफेलाइटिस भी समाप्त हो गया है और अब हम नए युग में नए गोरखपुर तथा नए उत्तर प्रदेश का दर्शन कर रहे हैं। सीएम योगी बुधवार पूर्वाह्न इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) गोरखपुर की तरफ से संचालित चैरिटेबल ब्लड बैंक के उद्घाटन समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।

माफिया और मच्छर की तरह इंसेफेलाइटिस भी समाप्त
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि साढ़े नौ वर्ष पहले पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस से तड़पते बच्चों और दम तोड़ते बचपन को देखकर हर जागरूक माता-पिता चिंतित रहता था। उन्होंने कहा, “माफिया और मच्छर की तरह इंसेफेलाइटिस भी समाप्त हो गया है।” उन्होंने कहा कि अब नए युग में नए गोरखपुर और नए उत्तर प्रदेश का दर्शन हो रहा है। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि सरकार प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में 10-10 बेड की डायलिसिस यूनिट की सुविधा शुरू कर रही है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज से स्वास्थ्य सेवाओं में बदलाव
मुख्यमंत्री ने कहा कि करीब साढ़े नौ वर्ष पहले गोरखपुर का बीआरडी मेडिकल कॉलेज ही इस क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं का प्रमुख केंद्र था। उस समय एक ही बेड पर चार-चार मरीज भर्ती रहते थे और तीसरी मंजिल पर इंसेफेलाइटिस वार्ड में पंखे, शौचालय समेत अन्य जरूरी सुविधाओं का अभाव था। उन्होंने कहा कि जो बीआरडी मेडिकल कॉलेज पहले स्वयं अस्वस्थ था, आज वही सुपर स्पेशियलिटी सेंटर और इंसेफेलाइटिस समेत विभिन्न बीमारियों के उपचार का प्रमुख केंद्र बन गया है।
यूपी में 85 मेडिकल कॉलेज और 13,500 से अधिक एमबीबीएस सीटें
सीएम योगी ने कहा कि गोरखपुर में एम्स स्थापित हो चुका है। महाराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, सिद्धार्थनगर, बस्ती, बलरामपुर, बहराइच, गोंडा, अयोध्या और अंबेडकरनगर समेत विभिन्न जिलों में मेडिकल कॉलेज शुरू हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 75 जिले हैं, जबकि मेडिकल कॉलेजों की संख्या 85 हो गई है। दो एम्स भी संचालित हैं। एमबीबीएस की सीटें 4,600 से बढ़कर 13,500 से अधिक हो चुकी हैं और पीजी की सीटें दोगुनी हुई हैं। नर्सिंग और पैरामेडिकल शिक्षा का भी विस्तार किया जा रहा है।
कभी दुर्दांत माफिया थे जिलों की पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय प्रदेश के प्रत्येक जिले की पहचान किसी न किसी दुर्दांत माफिया से जुड़ गई थी और डॉक्टर उनके शिकार बनते थे। उन्होंने कहा कि गोरखपुर में डॉक्टरों के अपहरण, रंगदारी मांगने, धमकी भरे फोन और चेंबर में घुसकर मारपीट जैसी घटनाएं होती थीं।
सीएम योगी ने कहा कि इन घटनाओं के खिलाफ उन्हें चिकित्सकों के साथ सड़कों पर आंदोलन करना पड़ता था। उनके मुताबिक आज गोरखपुर समेत पूरे प्रदेश में चिकित्सक, व्यापारी और नागरिक स्वयं को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। अब प्रदेश की पहचान माफिया से नहीं बल्कि ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज’ के लक्ष्य से बन रही है।
खून बनाया नहीं जा सकता, रक्तदान संवेदना का प्रतीक
रक्तदान के महत्व पर मुख्यमंत्री ने कहा कि अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीक, दवाएं और संसाधन उपलब्ध कराए जा सकते हैं, लेकिन खून बनाया नहीं जा सकता। उन्होंने रक्तदान को उस संवेदना का प्रतीक बताया, जिसके माध्यम से एक व्यक्ति जरूरतमंद को नया जीवन देता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रक्त की मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं हो पाती है। इसके लिए चिकित्सकों को लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान के लिए प्रेरित करना चाहिए। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से समय-समय पर रक्तदान की अपील और जागरूकता अभियान चलाने की बात कही।
पेशेवर रक्तदाताओं पर प्रभावी अंकुश की बात
सीएम योगी ने पेशेवर रक्तदाताओं को लेकर भी आगाह किया। उन्होंने कहा कि विभिन्न बीमारियों से ग्रसित पेशेवर रक्तदाताओं पर प्रभावी अंकुश नहीं लगाया गया तो संक्रमण का गंभीर संकट पैदा हो सकता है। उन्होंने ऐसी गतिविधियों को शासन-प्रशासन के संज्ञान में लाने और चिकित्सकों को जागरूकता कार्यक्रमों से जोड़ने की बात कही।
आईएमए के सामाजिक सरोकारों की सराहना
मुख्यमंत्री ने आईएमए के सामाजिक सरोकारों की सराहना करते हुए कहा कि आईएमए केवल प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सकों की संस्था नहीं है। गोरखपुर में निशुल्क ओपीडी के बाद चैरिटेबल ब्लड सेंटर शुरू करके संस्था ने सामाजिक उत्तरदायित्व का उदाहरण प्रस्तुत किया है।
उन्होंने कहा कि किसी भी संस्था की वास्तविक पहचान इससे होती है कि वह अपनी विशेषज्ञता का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति तक पहुंचाने में कितना योगदान देती है। सीएम ने बताया कि 2017-18 में गोरखपुर के सीतापुर आई हॉस्पिटल में आईएमए ने निशुल्क ओपीडी शुरू की थी।
गुरु गोरखनाथ चिकित्सालय का उदाहरण
मुख्यमंत्री ने अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज के सानिध्य में गुरु गोरखनाथ चिकित्सालय की शुरुआत का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि अस्पताल को पहले 10 बेड से शुरू करने की चर्चा हुई थी, लेकिन गोरखपुर के चिकित्सकों के सहयोग से शुरुआत में ही इसे 100 बेड का अस्पताल बनाया गया।
उन्होंने कहा कि इस चिकित्सालय ने दिखाया कि चैरिटी में भी अस्पताल, ब्लड बैंक और आईसीयू सफलतापूर्वक संचालित हो सकते हैं। यहां ब्लड सेपरेटर, एफेरेसिस और डायलिसिस जैसी सुविधाएं विकसित हुईं। मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने प्रदेश के जिला अस्पतालों में भी निशुल्क डायलिसिस की व्यवस्था शुरू करने का कार्य प्रारंभ किया है।
स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आईआईटी कानपुर के सहयोग से मेडटेक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा एसजीपीजीआई लखनऊ में भी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पर काम हो रहा है।
स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाई पर पहुंचाया
आईएमए गोरखपुर के अध्यक्ष डॉ. आरपी शुक्ला ने मुख्यमंत्री और अन्य अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि सीएम योगी ने अपने विजन से गोरखपुर और प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाई पर पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में गोरखपुर मेडिकल हब और मेडिकल टूरिज्म का नया केंद्र बन रहा है।
डॉ. शुक्ला ने बताया कि आईएमए के 400 यूनिट की क्षमता वाले इस चैरिटेबल ब्लड सेंटर का संकल्प है कि रक्त के अभाव में किसी की मृत्यु न होने दी जाए। समारोह को महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव और गोरखपुर ग्रामीण के विधायक विपिन सिंह ने भी संबोधित किया।
नन्ही बच्ची को दुलारा, दिया आशीर्वाद
ब्लड सेंटर के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नजर परिसर में मौजूद एक नन्ही बच्ची पर पड़ी। उन्होंने बच्ची से आत्मीयता से बातचीत की और उसका हालचाल पूछा। मुख्यमंत्री ने बच्ची को स्नेह और आशीर्वाद भी दिया।
यह भी पढ़ें: यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में पहली बार दिखेगा प्रदेश का स्पोर्ट्स मॉडल, 200 वर्ग मीटर का पवेलियन तैयार