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फारूक अब्दुल्ला का भाजपा पर हमला

राज्य का दर्जा बहाली पर जम्मू-कश्मीर में सियासी घमासान, फारूक अब्दुल्ला ने भाजपा पर साधा निशाना

जम्मू-कश्मीर विधानसभा के शरदकालीन सत्र के दौरान राज्य का दर्जा बहाल करने का प्रस्ताव पारित होने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई।

राज्य का दर्जा बहाली पर जम्मू-कश्मीर में सियासी घमासान फारूक अब्दुल्ला ने भाजपा पर साधा निशाना

फारूक अब्दुल्ला का भाजपा पर हमला |

श्रीनगर: नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने शुक्रवार को भाजपा पर जम्मू और कश्मीर के लोगों को गुलाम बनाने की चाह का आरोप लगाया। विपक्षी दल ने राज्य का दर्जा देने के प्रस्ताव को असंवैधानिक करार दिया। मीडिया से बात करते हुए फारूक अब्दुल्ला ने कहा, भाजपा लंबे समय से जम्मू और कश्मीर के लोगों को गुलाम बनाना चाहती है। यह कोई नई बात नहीं है। विधानसभा के शरदकालीन सत्र के बाद उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री से सवाल करना और उन्हें निशाना बनाना विधायी प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि विधानसभा सत्र का उद्देश्य मुद्दों पर चर्चा करना, सरकार की गलतियों को उजागर करना और उससे जवाब मांगना है।

अब्दुल्ला ने विधानसभा में सरकार से जवाबदेही पर दिया जोर

अब्दुल्ला ने कहा, विधानसभा सत्र का मूल उद्देश्य चर्चा करना, सरकार की गलतियों को सामने लाना और सरकार से उनका जवाब मांगना है। मुख्यमंत्री को निशाना बनाना इस प्रक्रिया का हिस्सा है जो भी इस पद पर होता है, उसे इन सब का सामना करना पड़ता है। 28 सितंबर को जम्मू और कश्मीर विधानसभा में राज्य का दर्जा बहाल करने का एक नया प्रस्ताव पारित किया गया। 2019 में अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के बाद से ही जम्मू-कश्मीर विधानसभा (जेकेएनसी) के एजेंडे में राज्य का दर्जा बहाल करना शामिल रहा है। हाल ही में केंद्र शासित प्रदेश में सत्तारूढ़ दल ने इस मांग को लेकर राष्ट्रीय राजधानी तक रैलियां कीं।

राज्य का दर्जा प्रस्ताव भाजपा के विरोध के बीच पारित

भाजपा ने सदन में हंगामे के बीच पारित प्रस्ताव का विरोध किया। पार्टी ने प्रस्ताव को काला एजेंडा करार दिया और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाया। भाजपा ने उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली जम्मू-कश्मीर राष्ट्रीय विधानसभा सरकार के खिलाफ जम्मू-कश्मीर में भी विरोध प्रदर्शन किए। आधिकारिक विधानसभा पोर्टल के अनुसार, जम्मू-कश्मीर विधानसभा का शरदकालीन सत्र 21 से 30 सितंबर तक आयोजित किया गया। सात सत्रों वाले इस सत्र में विधायकों ने रोजगार, आरक्षण, श्रमिकों का नियमितीकरण, बिजली शुल्क और अन्य जनहित संबंधी मुद्दों को उठाया। 

(इनपुट: ANI)

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