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रामनगर में बाढ़ तैयारी तेज, जियो बैग लगाए गए

रामनगर में बाढ़ बचाव की तैयारी तेज, सिसौंडा के कोरिन पुरवा में लगाए गए जियो बैग और परकोपाइन

तहसील रामनगर क्षेत्र के तपेशिपाह गांव के निकट कोरिन पुरवा के पास बाढ़ से बचाव की तैयारियां तेज कर दी गई हैं।

रामनगर में बाढ़ बचाव की तैयारी तेज सिसौंडा के कोरिन पुरवा में लगाए गए जियो बैग और परकोपाइन

Flood Defense |

बाराबंकी {उत्तर प्रदेश}: तहसील रामनगर क्षेत्र के तपेशिपाह गांव के निकट कोरिन पुरवा के पास बाढ़ से बचाव की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। बाढ़ खंड विभाग द्वारा नदी के कटान को रोकने और ग्रामीणों को संभावित खतरे से बचाने के लिए व्यापक सुरक्षा कार्य कराया जा रहा है। बरसात के दौरान नदी की तेज धारा से होने वाले नुकसान को कम करने के उद्देश्य से विभाग ने पहले ही बचाव कार्य शुरू कर दिया है।

जियो बैग और एसी बैग से मजबूत किया जा रहा तट

बाढ़ खंड विभाग के अनुसार चौघड़िया के पास करीब 450 मीटर क्षेत्र में 1,88,611 एसी बैग लगाए जा चुके हैं। इसके अलावा 2,000 जियो बैग लगाकर 12 स्टड तैयार किए गए हैं। वहीं करीब 200 मीटर क्षेत्र में 6,000 जियो बैग भी लगाए गए हैं।

कटान रोकने के लिए लगाए गए परकोपाइन

नदी के किनारे 460 परकोपाइन स्थापित किए गए हैं। इनके माध्यम से सरयू-घाघरा नदी की धारा को नियंत्रित करने और कटान को रोकने का प्रयास किया जा रहा है। विभाग का मानना है कि इससे नदी के तटों को मजबूती मिलेगी और आसपास के गांवों को सुरक्षा प्रदान की जा सकेगी।

अंतिम चरण में पहुंचा बचाव कार्य

विभागीय अधिकारियों के अनुसार यह कार्य 30 अप्रैल से शुरू किया गया था और अब तक लगातार जारी है। हालांकि जिलाधिकारी बाराबंकी ईशान प्रताप सिंह द्वारा 10 जून तक कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए गए थे। कार्य को समय पर पूरा करने के लिए बड़ी संख्या में मजदूर लगाए गए हैं। फिलहाल चौघड़िया भरने का कार्य अंतिम चरण में है।

अधिकारियों की निगरानी में चल रहा निर्माण

गांव के किनारे चौघड़िया के पास परकोपाइन स्टड और ठोकर का निर्माण किया गया है, जिसका उद्देश्य नदी की धारा का रुख बदलना और कटान को नियंत्रित करना है। सुरक्षा के लिए लगाए जा रहे जियो बैग और बोरियों में नदी की बालू भरकर उन्हें मजबूत बनाया गया है। कार्य का निरीक्षण जेई बीपी सिंह, जेई प्रदीप कुमार वर्मा और जेई राहुल द्वारा किया जा रहा है।

हर वर्ष कटान से प्रभावित होता है क्षेत्र

ज्ञात हो कि घाघरा नदी हर वर्ष कोरिन पुरवा गांव के पास कटान करती है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह सुरक्षा कार्य कराया जा रहा है। बाढ़ खंड अधिकारी शशिकांत सिंह ने बताया कि बाढ़ बचाव कार्य अंतिम चरण में है और केवल चौघड़िया भरने का कार्य प्रमुख रूप से शेष है।

डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से हो रहा कार्य

उन्होंने बताया कि करीब 1.5 करोड़ रुपये की लागत से यह परियोजना संचालित की जा रही है। नदी की धारा को नियंत्रित करने और कटान रोकने के लिए जियो बैग, एसी बैग, परकोपाइन और स्टड लगाए जा रहे हैं। विभाग का दावा है कि समय रहते कार्य पूरा कर लिया जाएगा, जिससे बरसात के दौरान क्षेत्र के गांवों को बाढ़ और कटान से राहत मिल सकेगी।

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