Madhya Pradesh : बालाघाट। मध्यप्रदेश में नक्सल गतिविधियों को लोग अब इतिहास के पन्नों में पढ़ेंगे। बालाघाट–मंडला बेल्ट में सक्रिय बचे हुए दो अंतिम नक्सलियों ने भी आत्मसमर्पण कर दिया है।
Madhya Pradesh : बालाघाट। मध्यप्रदेश में नक्सल गतिविधियों को लोग अब इतिहास के पन्नों में पढ़ेंगे। बालाघाट–मंडला बेल्ट में सक्रिय बचे हुए दो अंतिम नक्सलियों ने भी आत्मसमर्पण कर दिया है। 35 वर्षों से चल रहा नक्सल समस्या अब इतिहास बन गया है। आत्मसमर्पण करने वालों में रोहित (14 लाख का इनामी) और दीपक (29 लाख का इनामी) शामिल हैं। दोनों पर कई गंभीर वारदातों में शामिल होने के आरोप थे और लंबे समय से सुरक्षा बलों के रडार पर थे।
अत्मसमर्पण अभियान की सफलता
एक सप्ताह के भीतर 22 नक्सलियों ने हथियार डाले, जबकि बीते डेढ़ महीने में 42 लोग समर्पण कर चुके हैं। इससे सुरक्षा एजेंसियों के मनोबल में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।सरकार का कहना है कि लगातार सुरक्षा अभियान, विकास कार्यों की गति और स्थानीय लोगों के सहयोग से नक्सली संगठन पूरी तरह कमजोर पड़ चुके हैं
सरकार का लक्ष्य पूरा हुआ
मुख्यमंत्री और गृह विभाग के नेतृत्व में राज्य सरकार ने वर्ष 2026 तक “नक्सल-मुक्त एमपी” का लक्ष्य रखा था। लेकिन सुरक्षा बलों के सर्च ऑपरेशनों और समर्पण नीति की सफलता ने राज्य को लक्ष्य से पहले ही नक्सलवाद-मुक्त करा दिया।अधिकारियों के मुताबिक, अब प्रदेश में नक्सल नेटवर्क का कोई सक्रिय ढांचा नहीं बचा है।
35 साल की लड़ाई पर एक नज़र
58 नक्सलियों का सफाया किया गया। 57 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। 28 हथियार बरामद किये गये। 46 लाख से अधिक का इनाम घोषित, आरोपियों पर कार्रवाई की गई।
कैसे बदले हालात?
सुरक्षाबलों की निरंतर कार्रवाई, ड्रोन सर्विलांस, जंगल क्षेत्रों में तैनाती बढ़ाना और स्थानीय समुदाय से संवाद ने नक्सलियों को भारी हानि पहुंचाई।इसका परिणाम यह हुआ कि संगठन की आपूर्ति, नेटवर्क और नेतृत्व सभी पूरी तरह टूट गए।
अब आगे क्या?
सरकार का कहना है कि जिन इलाकों में कभी नक्सलियों का प्रभाव था, वहाँ अब विकास कार्यों को तेज़ किया जाएगा। सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार से जुड़े प्रोजेक्ट प्राथमिकता पर होंगे।
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