देवास। जिले में स्थित खेवनिया वन्यजीव अभयारण्य में हाल ही में पक्षी-प्रेमियों और वन अधिकारियों को एक बेहद दुर्लभ...
देवास। जिले में स्थित खेवनिया वन्यजीव अभयारण्य में हाल ही में पक्षी-प्रेमियों और वन अधिकारियों को एक बेहद दुर्लभ दृश्य देखने को मिला। हिमालय की ऊँची पर्वतमालाओं से हजार किलोमीटर से अधिक दूरी तय करके विशाल आकार के गिद्ध यहां पहुंचे हैं।
रेड हेडेड व इंडियन वल्चर साथ दिखे
वन विभाग के अनुसार यह पहली बार दर्ज हुआ है कि हिमालयन ग्रिफॉन गिद्ध यहां किंग (रेड-हेडेड) वल्चर और इंडियन वल्चर के साथ एक ही स्थान पर देखे गए। ये तीनों प्रजातियाँ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संकटग्रस्त मानी जाती हैं, इसलिए इनका एक साथ दिखना वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हिमालयन ग्रिफॉन ठंडे व ऊंचे क्षेत्रों में पाये जाते हैं
विशेषज्ञों का क्या कहना है, वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि हिमालयन ग्रिफॉन आमतौर पर ठंडे और ऊँचे पर्वतीय क्षेत्रों में पाए जाते हैं। सर्दियों में भोजन की तलाश और अनुकूल मौसम की वजह से वे मैदानी इलाकों की ओर लंबी उड़ान भरते हैं। देवास के इस अभयारण्य में उनका पहुंचना इस बात का संकेत है कि यहां का पारिस्थितिक तंत्र गिद्धों के लिए सुरक्षित और अनुकूल बन रहा है।
यह इसलिए महत्वपूर्ण
तीन संकटग्रस्त गिद्ध प्रजातियों का एक साथ दिखना अत्यंत दुर्लभ है। पिछले वर्ष से इंडियन वल्चर ने इस क्षेत्र को अपना निवास बनाना शुरू किया है। इससे संकेत मिलता है कि यहां भोजन स्रोत और पर्यावरणीय संतुलन बेहतर है। वन विभाग अब इन गिद्धों की गतिविधियों पर निगरानी रख रहा है ताकि उनके प्रवास, व्यवहार और संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण आंकड़े जुटाए जा सकें।
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