गोरखपुर AIIMS की निदेशक डॉ. विभा दत्ता को कैथ लैब की सुविधा नहीं होने के कारण जांच के लिए निजी अस्पताल जाना पड़ा। अखिलेश यादव ने इस मामले पर सरकार को घेरा।
Gorakhpur AIIMS Director Visits Private Hospital, Akhilesh Questions Facilities |
गोरखपुर (उत्तर प्रदेश)। यूपी के गोरखपुर एम्स की निदेशक डा. विभा दत्ता को चक्कर आने के बाद हृदय की जांच और अनुभवी चिकित्सक की सलाह के लिए एम्स के बाहर निजी अस्पताल जाना पड़ा। हालांकि जांच में सब कुछ सामान्य निकला, लेकिन सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उनके निजी अस्पताल में जांच और इलाज के लिए जाने पर एम्स की दुर्व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए सरकार पर निशाना साधते हुए ट्वीट कर दिया है।
एम्स में कैथ लैब की सुविधा नहीं होने से निजी अस्पताल पहुंचीं निदेशक
दरअसल एम्स में कैथ लैब की सुविधा उपलब्ध नहीं होने की वजह से उन्हें निजी अस्पताल ले जाना पड़ा, जिससे वो विपक्ष के निशाने पर आ गई और इस पर राजनीति शुरू हो गई है। गोरखपुर एम्स की निदेशक (डायरेक्टर) डा. विभा दत्ता को 28 अक्टूबर (बुधवार) को उनके एम्स स्थित सरकारी आवास पर चक्कर आ गया और वे बेहोश हो गईं। इसके बाद उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया। वहां पर जांच और इलाज के बाद उन्हें जांच के लिए शाम को निजी अस्पताल ले जाया गया। वहां पर उनकी जांच और इलाज के लिए चिकित्सीय सलाह लेने के बाद वे वापस आ गईं। रिपोर्ट में सब कुछ सामान्य निकला। 29 अक्टूबर (गुरुवार) को उन्हें काम भी किया।
एम्स गोरखपुर में कैथ लैब नहीं होने से निजी अस्पताल में करानी पड़ी जांच
दरअसल एम्स गोरखपुर में कैथ लैब और मशानों को लगाने का काम चल रहा है। ऐसे में एम्स की कार्यकारी निदेशक डा. विभा दत्ता को बीमार होने पर जब भर्ती कराया गया, तो उन्हें एम्स में कैथ लैब (कैथेटराइजेशन लेबोरेटरी) की सुविधा नहीं मिल पाई। कैथ लैब में हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियों की जांच की जाती है। यही वजह है कि उन्हें निजी अस्पताल में जाना पड़ा। वहां पर उनकी जांच और इलाज में आधे घंटे का समय लगा। इसके बाद वे वापस आ गईं।
सात साल बाद भी एम्स में कैथ लैब नहीं
एम्स पूर्वांचल का प्रमुख चिकित्सा संस्थान है। एम्स को शुरू हुए सात साल हो चुके हैं। एम्स का शुभारंभ फरवरी 2019 में हुआ। सात साल बाद भी कैथ लैब नहीं बन पाने की वजह से एम्स की निदेशक डॉ. विभा दत्ता को निजी चिकित्सालय में इलाज के लिए जाना पड़ा। यही वजह है कि एम्स में कैथ लैब नहीं होने से सवाल उठ रहे हैं। डा. विभा दत्ता ने 30 जनवरी 2025 को एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक का पदभार संभाला था। इससे पहले वह वर्ष 2018 से 2023 तक एम्स नागपुर की निदेशक रह चुकी हैं। वह गोरखपुर एम्स की पांचवीं कार्यकारी निदेशक हैं।
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