उज्जैन के बड़नगर तहसील के बंगरेड गांव में रविवार को एक तिलक समारोह (सगाई) के दौरान दहेज प्रथा के खिलाफ एक अनोखी और प्रेरणादायक मिसाल देखने को मिली।
उज्जैन (एमपी)। जिले से एक सकारात्मक और समाज को दिशा दिखाने वाली खबर सामने आई है। बड़नगर तहसील के बंगरेड गांव में रविवार को एक तिलक समारोह (सगाई) के दौरान दहेज प्रथा के खिलाफ एक अनोखी और प्रेरणादायक मिसाल देखने को मिली।
यह है पूरा मामला
रविवार को बंगरेड के लोटस रिसॉर्ट में तिलक समारोह आयोजित किया गया था। इस समारोह में वधु पक्ष की ओर से परंपरा का पालन करते हुए 25 लाख रुपये नकद और करीब 15 तोला सोना उपहार स्वरूप (दहेज के रूप में) पेश किया गया। वहां मौजूद सभी लोग तब दंग रह गए जब दूल्हे आदर्श और उनके पिता जितेंद्र सिंह राजावत ने इसे लेने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने दहेज की इस भारी-भरकम राशि को स्वीकार करने के बजाय उसे लौटा दिया। दूल्हे ने दहेज के तौर पर सिर्फ एक अंगूठी ली।
परिवार ने दिया भावुक संदेश
दहेज लौटाते हुए दूल्हे के पिता जितेंद्र सिंह राजावत ने बहुत ही मार्मिक बात कही, जो वहां मौजूद लोगों के दिलों को छू गई। उन्होंने कहा, "हमें बहू नहीं, बेटी चाहिए।" उनका यह बयान न केवल समारोह में मौजूद लोगों के लिए भावनात्मक था, बल्कि समाज के लिए एक बड़ा संदेश भी था कि शादी लेन-देन का सौदा नहीं, बल्कि दो परिवारों का मिलन और रिश्तों का बंधन है।
समाज में हो रही चर्चा
आज के समय में जब शादियों में दहेज को सामाजिक प्रतिष्ठा से जोड़ा जाता है, तब इस परिवार द्वारा उठाया गया यह कदम वाकई सराहनीय है। इस फैसले की अब पूरे इलाके में चर्चा हो रही है और लोग दूल्हे आदर्श और उनके परिवार की खूब प्रशंसा कर रहे हैं। यह घटना समाज को यह संदेश देती है कि अगर हम अपनी सोच बदलें, तो दहेज जैसी कुप्रथाओं को जड़ से खत्म किया जा सकता है।
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