ग्वालियर। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने वस्तु एवं सेवा कर (GST) के भुगतान और रिफंड से...
ग्वालियर हाईकोर्ट का निर्देश, बिल्डर के लंबित GST भुगतान पर 30 दिन में निर्णय लें अधिकारी |
ग्वालियर। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने वस्तु एवं सेवा कर (GST) के भुगतान और रिफंड से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कर विभाग के अधिकारियों को करदाताओं के आवेदनों पर समयबद्ध तरीके से निर्णय लेना होगा।
हाईकोर्ट ने जीएसटी अधिकारियों को बिल्डर के लंबित भुगतान मामले में 30 दिनों के भीतर फैसला लेने का आदेश दिया है। याचिकाकर्ता (बिल्डर) को निर्देश दिया गया है कि वह 15 दिनों के भीतर संबंधित अधिकारियों के समक्ष एक नया आवेदन प्रस्तुत करे।
दावा सही तो तत्काल राशि की वापसी
कोर्ट ने कहा है कि यदि जांच के बाद याचिकाकर्ता का दावा सही पाया जाता है तो विभाग को तत्काल राशि वापस (Refund) करनी होगी।
यह है पूरा मामला
यह मामला एक बिल्डर द्वारा जमा किए गए जीएसटी और उसके रिफंड से संबंधित है। याचिकाकर्ता का पक्ष था कि उनकी राशि विभाग के पास लंबित है और उस पर कोई उचित निर्णय नहीं लिया जा रहा है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने विभागीय कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाते हुए यह सुनिश्चित करने को कहा कि करदाताओं को अनावश्यक परेशान न होना पड़े।
याचिकाकर्ता दें नया आवेदन
कोर्ट ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता अगले 15 दिनों में अपनी पूरी दलीलों के साथ नया आवेदन दें। आवेदन प्राप्त होने के बाद जीएसटी अधिकारी 30 दिन की समय सीमा के अंदर मामले का निस्तारण करें। यदि याचिकाकर्ता रिफंड का पात्र है तो नियमानुसार राशि वापस की जाए।
सरकारी कार्यप्रणाली व जवाबदेही तय करने में बड़ा कदम
अदालत का यह फैसला उन बिल्डरों और व्यापारियों के लिए बड़ी राहत है जिनके रिफंड या टैक्स संबंधी मामले लंबे समय से सरकारी दफ्तरों में अटके हुए हैं। यह आदेश सरकारी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
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