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फर्जी बोनस पर HC ने फैसला सुरक्षित रखा

शिक्षक भर्ती परीक्षा में दिए 'फर्जी बोनस अंक' मामले में हाईकोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला

जबलपुर | मध्य प्रदेश की प्राथमिक शिक्षक भर्ती-2025 की मेरिट लिस्ट अब कानूनी विवादों के घेरे में आ गई है।

शिक्षक भर्ती परीक्षा में दिए फर्जी बोनस अंक मामले में हाईकोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला

Teacher Recruitment |

जबलपुर | मध्य प्रदेश की प्राथमिक शिक्षक भर्ती-2025 की मेरिट लिस्ट अब कानूनी विवादों के घेरे में आ गई है। जबलपुर हाईकोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया में हुई कथित गड़बड़ियों और अनियमितताओं को लेकर दायर याचिकाओं पर अपनी सुनवाई पूरी कर ली है और इस मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

​बोनस अंकों का गलत आवंटन

​याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट के समक्ष दलील दी कि भर्ती विज्ञापन की कंडिका 7.7 का उल्लंघन किया गया है। याचिका के अनुसार, ​नियमों के तहत केवल RCI (भारतीय पुनर्वास परिषद) से मान्यता प्राप्त 'विशेष शिक्षा' डिग्री/डिप्लोमा धारकों को ही 5% बोनस अंक दिए जाने का प्रावधान था। आरोप है कि चयन प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे अभ्यर्थियों को भी बोनस अंक दे दिए गए, जिनके पास आवश्यक योग्यता या प्रमाण पत्र नहीं थे।

​14000 उम्मीदवारों को दिये बोनस अंक

डाटा के अनुसार, लगभग 14,000 उम्मीदवारों को बिना किसी भौतिक सत्यापन (Physical Verification) के, केवल सॉफ्टवेयर एंट्री के आधार पर बोनस अंक प्रदान कर दिए गए। हाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट किया है कि वर्तमान में जारी की गई मेरिट लिस्ट कोर्ट के अंतिम फैसले के अधीन होगी।

​मेरिट लिस्ट प्रभावित हुई

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि बिना दस्तावेजों की जांच किए बोनस अंक देने से मेरिट लिस्ट पूरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे पात्र उम्मीदवार चयन से बाहर हो गए हैं। ​अदालत अब इस पर विचार कर रही है कि क्या पूरी सूची को पुनरीक्षित (Revise) करने की आवश्यकता है। उम्मीदवारों को अब हाईकोर्ट के अंतिम आदेश का इंतजार है, जो यह तय करेगा कि भर्ती प्रक्रिया इसी सूची के साथ आगे बढ़ेगी या इसमें बड़े बदलाव किए जाएंगे।

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