इंदौर खंडपीठ ने शहर के BRTS (Bus Rapid Transit System) कॉरिडोर को हटाने के काम में हो रही अत्यधिक देरी और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाया है।
इंदौर। इंदौर खंडपीठ ने शहर के BRTS (Bus Rapid Transit System) कॉरिडोर को हटाने के काम में हो रही अत्यधिक देरी और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सख्त टिप्पणी करते हुए अधिकारियों से जवाब मांगा कि आदेश के महीनों बाद भी अब तक रेलिंग और बस स्टॉप पूरी तरह क्यों नहीं हटाए गए हैं।
ट्रैफिक जाम व दुर्घटना से दो चार होती जनता
जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि प्रशासन की सुस्ती के कारण जनता को रोज ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाओं का सामना करना पड़ रहा है। कोर्ट ने तीखे लहजे में कहा, "हमें समझ नहीं आता कि आखिर काम किस तरह से किया जा रहा है।" कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि काम की गति नहीं बढ़ी, तो संबंधित ठेकेदार पर भारी जुर्माना (Penalty) लगाया जाएगा और उसकी बैंक गारंटी भी जब्त की जा सकती है।
तुरंत डिवाइडर व लाइटनिंग का काम शुरू करें
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि रेलिंग हटाने के बाद सड़क पर स्थायी डिवाइडर नहीं बनाए गए हैं, जिससे वाहन कहीं से भी मुड़ रहे हैं और अव्यवस्था फैल रही है। कोर्ट ने नगर निगम को निर्देश दिया कि 3.1 किलोमीटर के हिस्से में तुरंत सेंट्रल डिवाइडर और लाइटिंग का काम शुरू किया जाए। 11 महीने के लंबे इंतजार के बाद भी काम शुरू नहीं हुआ है। हाई कोर्ट ने करीब एक साल पहले ही बीआरटीएस हटाने का आदेश दे दिया था, लेकिन अब तक काम केवल कागजों और टेंडर प्रक्रिया में ही उलझा हुआ नजर आ रहा है।
अगली सुनवाई में प्रोग्रेस रिपोर्ट पेश करें
हाई कोर्ट ने नगर निगम आयुक्त और प्रशासन को अगली सुनवाई तक प्रोग्रेस रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया है कि सार्वजनिक हित (Public Interest) के काम में किसी भी तरह की लापरवाही या 'मुनाफे-नुकसान' का बहाना स्वीकार नहीं किया जाएगा।
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