जबलपुर। मध्य प्रदेश के बहुचर्चित नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़े मामले में हाईकोर्ट ने एक बार फिर कड़ा रुख...
जबलपुर। मध्य प्रदेश के बहुचर्चित नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़े मामले में हाईकोर्ट ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने सीबीआई और नर्सिंग काउंसिल से जवाब तलब करते हुए पूछा है कि सीबीआई की जांच में जो अधिकारी दोषी पाए गए थे, उन पर अब तक क्या दंडात्मक कार्रवाई की गई है।
यह है पूरा मामला
मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए सीबीआई, इंडियन नर्सिंग काउंसिल और मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल को इस संबंध में विस्तृत हलफनामा पेश करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 12 मई को निर्धारित की गई है।
सीबीआई जांच में सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई
सीबीआई की जांच में नर्सिंग कॉलेजों की बड़ी धांधली उजागर हुई है। सीबीआई द्वारा जांचे गए लगभग 800 नर्सिंग कॉलेजों में से करीब 600 कॉलेज पूरी तरह से 'अनुपयुक्त' पाए गए। इन कॉलेजों में भवन, लैब, लाइब्रेरी और 100 बिस्तरों वाले अस्पताल जैसी अनिवार्य सुविधाओं की भारी कमी पाई गई। कई नर्सिंग कॉलेज केवल कागजों पर ही चल रहे थे।
एक साथ 15-15 कॉलेजों में कार्यरत दिखे प्रिंसिपल और शिक्षक
जांच में यह भी सामने आया कि कई प्रिंसिपल और शिक्षकों को एक साथ 15-15 कॉलेजों में कार्यरत दिखाया गया था।
ऐसे हुआ मामले का खुलासा
लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल ने साल 2022 में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की थी। इस याचिका के जरिए उन्होंने वर्ष 2020-21 के दौरान प्रदेश में खुले सैकड़ों फर्जी नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता प्रक्रिया और उनमें व्याप्त भारी अनियमितताओं को उजागर किया था। कोर्ट ने अब सीबीआई से पूछा है कि जांच में किन-किन व्यक्तियों या संस्थानों की संलिप्तता पाई गई है और इतनी बड़ी गड़बड़ी मिलने के बावजूद अभी तक जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कोई आपराधिक कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
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