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IIT कानपुर ने सुलझाया C5aR2 का रहस्य

IIT कानपुर के वैज्ञानिकों की बड़ी सफलता, रहस्यमयी इम्यून रिसेप्टर C5aR2 का सुलझाया रहस्य

प्रोफेसर अरुण के. शुक्ला के नेतृत्व में IIT कानपुर के शोधकर्ताओं ने C5aR2 नामक प्रतिरक्षा रिसेप्टर के असामान्य सिग्नलिंग व्यवहार का रहस्य सुलझाने में बड़ी सफलता हासिल की है।

iit कानपुर के वैज्ञानिकों की बड़ी सफलता रहस्यमयी इम्यून रिसेप्टर c5ar2 का सुलझाया रहस्य

International Research Collaboration |

कानपुर (उत्तर प्रदेश): प्रोफेसर अरुण के. शुक्ला के नेतृत्व में IIT कानपुर के शोधकर्ताओं ने C5aR2 नामक प्रतिरक्षा रिसेप्टर के असामान्य सिग्नलिंग व्यवहार का रहस्य सुलझाने में बड़ी सफलता हासिल की है। यह रिसेप्टर लंबे समय से वैज्ञानिकों के लिए पहेली बना हुआ था।

क्रायो-ईएम तकनीक से मिली अहम जानकारी

क्रायोजेनिक-इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी (क्रायो-ईएम) की मदद से शोधकर्ताओं ने पता लगाया कि C5aR2 अपने करीबी रिसेप्टर C5aR1 से अलग तरीके से क्यों काम करता है। इसके साथ ही वैज्ञानिकों ने एक ऐसा नया अणु भी विकसित किया है जो केवल C5aR2 को लक्षित करता है।

शरीर की रक्षा प्रणाली में निभाता है अहम भूमिका

मानव शरीर का कॉम्प्लीमेंट सिस्टम बैक्टीरिया और वायरस जैसे रोगजनकों से बचाव की पहली पंक्ति माना जाता है। इस प्रणाली में कई प्रोटीन और एंजाइम मिलकर संक्रमण और चोट के खिलाफ शरीर की रक्षा करते हैं। इसी प्रक्रिया के दौरान कुछ विशेष प्रोटीन निकलते हैं, जो प्रतिरक्षा कोशिकाओं में मौजूद रिसेप्टर्स को सक्रिय करते हैं।

C5aR1 और C5aR2 में मिला बड़ा अंतर

कॉम्प्लीमेंट एनाफाइलैटॉक्सिन C5a दो रिसेप्टर्स C5aR1 और C5aR2 को सक्रिय करता है। जहां C5aR1 के काम करने के तरीके को वैज्ञानिक पहले से समझ चुके हैं, वहीं C5aR2 का व्यवहार अब तक रहस्य बना हुआ था। अध्ययन में पाया गया कि दोनों रिसेप्टर्स का बाहरी हिस्सा काफी हद तक समान है, लेकिन कोशिका के अंदर मौजूद हिस्से की संरचना अलग है।

गैर-पारंपरिक तरीके से देता है संकेत

शोधकर्ताओं के अनुसार, C5aR2 सामान्य सिग्नलिंग तंत्र से जुड़ने में सक्षम नहीं होता। इसके बजाय यह कोशिका के भीतर मौजूद अन्य गैर-पारंपरिक भागीदारों के साथ मिलकर अलग तरीके से संकेत भेजता है। यही कारण है कि इसका व्यवहार अन्य रिसेप्टर्स से अलग दिखाई देता है।

नया अणु R8Y बना बड़ी उपलब्धि

अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों ने R8Y नामक एक नया अणु विकसित किया है। यह अणु केवल C5aR2 से जुड़ता है और C5aR1 को प्रभावित नहीं करता। इससे दोनों रिसेप्टर्स की भूमिका को अलग-अलग समझने में मदद मिलेगी और भविष्य में अधिक सटीक दवाएं विकसित करने का रास्ता खुलेगा।

पशु मॉडलों पर होगी आगे की जांच

वैज्ञानिक अब R8Y अणु का परीक्षण पशु मॉडलों पर करने की तैयारी कर रहे हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि इससे भविष्य में सुरक्षित और अधिक प्रभावी उपचार विकसित करने में मदद मिल सकती है।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग से हुआ शोध

इस अध्ययन में IIT कानपुर के शोधकर्ताओं के साथ ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड विश्वविद्यालय, जापान के टोक्यो विश्वविद्यालय और क्योटो विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने भी सहयोग किया। शोध को DBT, वेलकम ट्रस्ट इंडिया एलायंस, ANRF, DST, ICMR और IIT कानपुर का समर्थन प्राप्त हुआ।

(एएनआई)

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