मप्र में टीईटी को लेकर स्थिति साफ हुई, 3 लाख में से केवल 70 हजार शिक्षक ही परीक्षा देंगे, पास करने के लिए 2 साल में 4 मौके मिलेंगे।
भोपाल। मध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर बनी असमंजस की स्थिति अब काफी हद तक साफ हो गई है। स्कूल शिक्षा विभाग और जनजातीय कार्य विभाग के कुल 3 लाख शिक्षकों में से अब केवल 70 हजार शिक्षकों को ही यह परीक्षा देनी होगी। विभाग शिक्षकों को परीक्षा पास करने के लिए अगले दो वर्षों में कुल 4 मौके देगा। इसके लिए विशेष टीईटी का आयोजन किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने की योजना
सरकार उन शिक्षकों को राहत देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका (Review Petition) दाखिल करने की योजना बना रही है, जो बिना टीईटी के नियुक्त हुए थे। इसके लिए विशेषज्ञों और अधिवक्ताओं से सलाह ली जा रही है। इस मामले में पता चला है कि करीब 70 हजार शिक्षक ऐसे हैं जो टीईटी की अनिवार्य श्रेणी में आ रहे हैं। इनमें वे शिक्षक शामिल हैं जिनकी नियुक्ति 2011 से पहले हुई थी या जो आरटीई (RTE) एक्ट के दायरे में आते हैं।
तैयार किये जाएंगे मॉडल पेपर
शिक्षकों की मदद के लिए मॉडल पेपर तैयार किए जाएंगे। यदि कोई शिक्षक चार प्रयासों के बाद भी परीक्षा पास नहीं कर पाता है, तो उसके लिए भविष्य में "स्पेशल टीईटी" का विकल्प भी रखा जा सकता है।
क्या है विभाग की योजना
आयुक्त अभिषेक सिंह ने शिक्षक संगठनों के साथ चर्चा की है। विभाग वर्तमान में दो मुख्य योजनाओं पर काम कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर शिक्षकों को परीक्षा से बाहर रखने का प्रयास करना। यदि परीक्षा अनिवार्य रहती है, तो शिक्षकों को पर्याप्त समय और संसाधन उपलब्ध कराना ताकि वे पात्रता सिद्ध कर सकें।
विधिक राय को प्राथमिकता
लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) में हुई बैठक में यह स्पष्ट किया गया है कि किसी भी निर्णय से पहले विधिक राय को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि शिक्षकों के हितों की रक्षा हो सके।
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