जबलपुर। मध्य प्रदेश में नया वित्त वर्ष शुरू होते ही घर और जमीन खरीदना महंगा हो गया है...
जबलपुर। मध्य प्रदेश में नया वित्त वर्ष शुरू होते ही घर और जमीन खरीदना महंगा हो गया है। 1 अप्रैल 2026 से पूरे प्रदेश में नई कलेक्टर गाइडलाइन लागू हो गई है। इससे रजिस्ट्री के लिए अब अधिक जेब ढीली करनी होगी।
गाइडलाइम में की गई बढ़ोतरी
प्रदेश की कुल 1 लाख 5 हजार लोकेशन में से लगभग 65,000 लोकेशन पर गाइडलाइन दरों में बढ़ोतरी की गई है। भोपाल की 740 प्रमुख लोकेशन पर प्रॉपर्टी के रेट बढ़ा दिए गए हैं। वहीं, इंदौर की 2625 लोकेशन पर कीमतों में इजाफा हुआ है।
रजिस्ट्री के लिए उमड़ी भीड़
नई दरें लागू होने से पहले, यानी 31 मार्च की रात तक, भोपाल और इंदौर समेत कई शहरों के पंजीयन कार्यालयों (Registry Offices) में लोगों की भारी भीड़ देखी गई। लोग बढ़ी हुई कीमतों से बचने के लिए आखिरी दिन तक रजिस्ट्री कराने की कोशिश में लगे रहे।
आम जनता पर यह होगा असर
गाइडलाइन रेट बढ़ने का सीधा मतलब है कि अब जमीन या मकान की सरकारी कीमत बढ़ गई है, जिससे स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस भी बढ़ जाएगी। जानकारों का मानना है कि नई दरों के लागू होने से आने वाले समय में रियल एस्टेट मार्केट में प्रॉपर्टी की बाजार कीमतें (Market Value) भी बढ़ सकती हैं। सरकार का तर्क है कि जिन इलाकों में नए हाईवे, मेट्रो या अन्य बुनियादी सुविधाएं विकसित हुई हैं, वहां की दरों को बाजार भाव के बराबर लाने के लिए यह बढ़ोतरी जरूरी थी।
जबलपुर में प्रॉपर्टी की कीमतों में भारी उछाल
जबलपुर जिले में भी जमीन और मकान खरीदना आम आदमी के लिए और भी महंगा हो गया है। प्रशासन द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई कलेक्टर गाइडलाइन लागू कर दी गई है, जिसके तहत जिले के विभिन्न क्षेत्रों में सरकारी दरों (Circle Rates) में जबरदस्त बढ़ोतरी की गई है।
9 फीसदी तक की बढ़ोतरी
जिले की कुछ प्राइम लोकेशंस और तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों में सरकारी दरों में 99% तक का इजाफा देखा गया है। औसतन दरों में भी 15% से 20% तक की वृद्धि दर्ज की गई है।
रजिस्ट्री शुल्क पर होगा सीधा असर
कलेक्टर गाइडलाइन में वृद्धि का सीधा मतलब है कि अब संपत्तियों की रजिस्ट्री महंगी हो जाएगी। स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस अब नए बढ़े हुए दामों के आधार पर वसूली जाएगी।
आम आदमी पर अतिरिक्त भार
जानकारों का मानना है कि इस बढ़ोतरी से अपना घर बनाने का सपना देख रहे मध्यमवर्गीय परिवारों की जेब पर अतिरिक्त भार पड़ेगा। रियल एस्टेट बाजार में भी इस बदलाव का व्यापक असर देखने को मिल सकता है। रिंग रोड, बायपास और नए विकसित हो रहे आवासीय इलाकों में दरों में सबसे ज्यादा उछाल आया है। प्रशासन का तर्क है कि बाजार मूल्य और सरकारी दरों के बीच के अंतर को कम करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
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