प्राइम न्यूज़ – एक कसम, राष्ट्र प्रथम
Breaking News
  • रुड़की के लंढोरा मे फिटनेस सेंटर पर अवैध वसूली का लोगों ने लगाया आरोप, गढ़वाल मंडल के रीजनल हेड डॉ. मोहम्मद आवेश ने मौके पर पहुंचकर जांच की, जांच के बाद सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया
  • मंगलवार सुबह सूतक काल के चलते हर की पौड़ी समेत सभी मंदिरों के कपाट बंद किए, शाम 7:45 बजे तक सूतक का प्रभाव रहेगा
  • हरिद्वार: CM धामी ने 7 मार्च को होने वाले गृह मंत्री अमित शाह के दौरे की तैयारियों की समीक्षा की, सुरक्षा, यातायात और स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दिए
  • झांसी के दो युवक ईरान मे फंसे, परिजनों ने मोदी सरकार से युवकों के हिंदुस्तान वापसी की लगाई गुहार
  • मथुरा : कान्हा की नगरी में होली का उत्सव, मंदिरों में गुलाल से होली खेली गई
  • हाथरस में यमुना एक्सप्रेस-वे पर बड़ा हादसा, कार को डबल डेकर बस ने मारी टक्कर, हादसे में 6 लोगों की मौत, 6 से ज्यादा घायल, घायलों का इलाज जारी
  • राज्यसभा के लिए BJP की लिस्ट जारी, बिहार से राज्यसभा उम्मीदवार नितिन नवीन राज्यसभा उम्मीदवार तो पश्चिम बंगाल से राहुल सिन्हा बने राज्यसभा प्रत्याशी
  • 9 मार्च को बंगाल पहुंचेगा चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार करेंगे नेतृत्व, 10 मार्च को आयोग की अहम बैठक तय
  • सोनिया गांधी का PM मोदी पर बोला हमला, ईरान हमले को लेकर उठाए सवाल, कहा- हमले को लेकर पीएम मोदी ने क्यों कुछ नहीं बोला

मां औऱ बहन ने खटखटाया हरेक दरवाजा

पाकिस्तानी जेल से 7 साल बाद रिहा, बालाघाट लौटा प्रसन्नजीत

करीब सात साल तक पाकिस्तानी जेल में बंद रहने के बाद प्रसन्नजीत आखिरकार अपने घर लौट आया। शुक्रवार देर रात जब वह कटंगी पहुंचा तो परिजन, रिश्तेदार और स्थानीय लोग भावुक हो उठे।

पाकिस्तानी जेल से 7 साल बाद रिहा बालाघाट लौटा प्रसन्नजीत

Indian Man Returns Home After Seven Years in Pakistan Jail |

बालाघाट। करीब सात साल तक पाकिस्तानी जेल में बंद रहने के बाद प्रसन्नजीत आखिरकार अपने घर लौट आया। शुक्रवार देर रात जब वह कटंगी पहुंचा तो परिजन, रिश्तेदार और स्थानीय लोग भावुक हो उठे। फूल-मालाओं से उसका स्वागत किया गया और लंबे संघर्ष के बाद परिवार ने राहत की सांस ली।

इंतजार और उम्मीद की मिसाल

प्रसन्नजीत के जीवन की यह कहानी दर्द, इंतजार और उम्मीद की मिसाल है। पाकिस्तान की जेल में बंद होने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। कुछ समय बाद पिता का निधन हो गया, जिसके बाद घर की पूरी जिम्मेदारी बहन और मां पर आ गई। सीमित साधनों, आर्थिक परेशानियों और मानसिक तनाव के बावजूद परिवार ने उम्मीद नहीं छोड़ी।

परिवार ने खटखटाया हर दरवाजा

प्रसन्नजीत की बहन ने प्रशासनिक दफ्तरों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक हर जगह गुहार लगाई। जहां कहीं भी उम्मीद की एक किरण दिखाई दी, वहां अपनी बात रखी। मां की आंखें अक्सर दरवाजे पर टिकी रहती थीं कि शायद आज बेटा लौट आए।

पाक कैसे पहुंचा, इसकी जानकारी नहीं

परिजनों के अनुसार प्रसन्नजीत को पाकिस्तान कैसे पहुंचा, इसकी स्पष्ट जानकारी आज भी सामने नहीं आ सकी है। खुद प्रसन्नजीत का कहना है कि घटना की वजह और परिस्थितियां उसे ठीक से याद नहीं हैं। लेकिन इतना तय है कि उसने जेल में बेहद कठिन समय बिताया।

38 घंटे की यात्रा के बाद पहुंचा बालाघाट

भारत सरकार के प्रयासों और लंबी कूटनीतिक प्रक्रिया के बाद उसकी रिहाई संभव हो सकी। करीब 38 घंटे की यात्रा तय कर वह अमृतसर से बालाघाट पहुंचा। घर लौटते ही भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। यह कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उस परिवार की है जिसने सात साल तक उम्मीद का दिया बुझने नहीं दिया। अब प्रशासन द्वारा प्रसन्नजीत की काउंसलिंग और पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू की जा रही है, ताकि वह सामान्य जीवन में लौट सके।

यह भी पढ़ें: https://www.primenewsnetwork.in/india/app-based-drivers-strike-at-jantar-mantar-over-minimum-fares/132346

न्यूनतम किराया तय करने की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर ऐप आधारित ड्राइवरों की हड़ताल

Related to this topic: