आज दुनिया भर में पहनी जाने वाली 'ब्लू जींस' के पीछे एक दिलचस्प कहानी है। इसका श्रेय लेवी स्ट्रॉस को जाता है। स्टॉस ने मेहनत-मजदूरी करने वाले लोगों की समस्या को समझा और उसका समाधान भी निकाला।
आज दुनिया भर में पहनी जाने वाली 'ब्लू जींस' के पीछे एक दिलचस्प कहानी है। इसका श्रेय लेवी स्ट्रॉस को जाता है। स्टॉस ने मेहनत-मजदूरी करने वाले लोगों की समस्या को समझा और उसका समाधान भी निकाला। लेवी स्ट्रॉस का जन्म 26 फरवरी 1829 को जर्मनी में हुआ था। उन्होंने जिंस की शुरूआत जर्मनी में की थी जो आगे चलकर अमरीका के सैन फ्रांसिस्को तक फैल गया।
जर्मन यहूदी अप्रवासी
लेवी स्ट्रॉस एक जर्मन-यहूदी अप्रवासी थे। उनका जन्म जर्मनी के बटेनहाइम में एक यहूदी परिवार में हुआ था। 1847 में पिता की मृत्यु के बाद वे न्यूयॉर्क चले गए। उनकी शुरुआती शिक्षा जर्मनी के बवेरिया के एक स्थानीय स्कूल में हुई थी। बाद में, गोल्ड रश (Gold Rush) के दौरान हजारों लोगों की तरह वे भी सैन फ्रांसिस्को पहुंचे।
इस तरह हुई बिजनेस की शुरुआत
सैन फ्रांसिस्को में उन्होंने अपना 'ड्राई गुड्स' (कपड़ों और अन्य सामान) का बिजनेस शुरू किया। इसी दौरान उन्होंने महसूस किया कि खदानों और खेतों में काम करने वाले मजदूरों के कपड़े (पैंट्स) बहुत जल्दी फट जाते थे। उन्हें एक ऐसे कपड़े की जरूरत थी जो बेहद टिकाऊ और मजबूत हो।
जींस का आविष्कार में योगदान
लेवी का सबसे बड़ा योगदान 'रिवेटेड जींस' (Riveted Jeans) था। इसमें उन्होंने काफी सहयोग दिया। उन्होंने दर्जी जैकब डेविस के साथ मिलकर एक तकनीक विकसित की। इसकी खासियत थी कि पैंट की जेबों के कोनों और उन जगहों पर जहाँ से कपड़ा फटने का डर रहता था, वहाँ तांबे की कीलें (Copper Rivets) लगाईं। इस तकनीक को 20 मई 1873 को पेटेंट मिला, जिसे आज आधुनिक 'जींस' के रूप में जानते हैं। लेवी स्ट्रॉस ने न केवल एक नया कपड़ा बनाया, बल्कि दुनिया का सबसे लोकप्रिय और टिकाऊ परिधान 'ब्लू जींस' पेश किया, जो आज भी फैशन और उपयोगिता का प्रतीक है।
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