इंदौर। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को इंदौर के औद्योगिक परिदृश्य को बदलने वाले 'इंदौर-पीथमपुर...
इंदौर। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को इंदौर के औद्योगिक परिदृश्य को बदलने वाले 'इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर' के प्रथम चरण का भूमिपूजन किया। यह परियोजना न केवल इंदौर बल्कि पूरे मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए 'माइलस्टोन' साबित होगी।
परियोजना में यह सब
यह प्रोजेक्ट कुल 100 किलोमीटर लंबा होगा। पहले चरण में 20 किमी की सड़क का काम शुरू किया गया है। इस कॉरिडोर के माध्यम से लगभग 1 लाख करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान है। साथ ही सरकार का दावा है कि इस परियोजना से प्रदेश के 6 लाख युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। यह कॉरिडोर इंदौर को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और अहमदाबाद कॉरिडोर से सीधी कनेक्टिविटी प्रदान करेगा।
हाई-टेक सिटी और 'ग्रोथ इंजन'
मुख्यमंत्री ने इस कॉरिडोर को पूरे मेट्रोपॉलिटन रीजन का 'ग्रोथ इंजन' बताया। इसके तहत हाई-टेक अर्बन सिटी में करीब 3300 एकड़ में एक आधुनिक और हाई-टेक अर्बन सिटी विकसित की जाएगी। कॉरिडोर के किनारे डेटा सेंटर, ग्रीन इंडस्ट्री, आईटी पार्क और नॉलेज बेस्ड सेक्टर विकसित किए जाएंगे। यहाँ वर्ल्ड-क्लास परिवहन व्यवस्था और लॉजिस्टिक हब बनाए जाएंगे।
किसान बनेंगे विकास के भागीदार
इस परियोजना की सबसे खास बात इसका 'लैंड पूलिंग मॉडल' है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि किसानों की जमीन का अधिग्रहण करने के बजाय उन्हें विकास में भागीदार बनाया जा रहा है। किसानों को उनकी जमीन का 60% विकसित भूखंड (Developed Plots) वापस दिया जाएगा। वर्तमान में करीब 650 करोड़ रुपये की कीमत के विकसित भूखंड किसानों को सौंपे जा चुके हैं। सरकार का मानना है कि इससे किसान केवल मुआवजा लेने वाले नहीं, बल्कि भविष्य के विकास में भागीदार बनेंगे।
मुख्यमंत्री का संदेश
यह कॉरिडोर प्रदेश के आर्थिक सशक्तिकरण का आधार बनेगा। हम मध्य प्रदेश को देश का औद्योगिक हब बनाने की दिशा में तेजी से बढ़ रहे हैं, जहां किसानों और युवाओं दोनों के हितों का ध्यान रखा गया है।
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