Infant dies six hours after birth; allegations of negligence at the CHC spark an uproar |
इटावा,(उत्तर प्रदेश)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) भरथना में जन्मे एक नवजात की जन्म के महज छह घंटे बाद सैफई पीजीआई में मौत हो जाने से हड़कंप मच गया। परिजनों ने अस्पताल स्टाफ पर प्रसव में लापरवाही, अवैध रूप से तीन हजार रुपये लेने और बिना डॉक्टर की मौजूदगी में डिलीवरी कराने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। सुबह परिजन नवजात का शव लेकर सीएचसी पहुंचे और जमकर हंगामा किया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह स्थिति को शांत कराया।
पूरी डिलीवरी केवल नर्सिंग स्टाफ ने कराई
भरथना थाना क्षेत्र के गांव चंदपुरा सिन्हुआ निवासी शैलेन्द्र कुमार ने बताया कि रविवार दोपहर प्रसव पीड़ा होने पर पत्नी ज्योति को सीएचसी में भर्ती कराया गया। आरोप है कि प्रसव कराने के नाम पर स्टाफ ने तीन हजार रुपये वसूले और बाहर की मेडिकल दुकान से कई इंजेक्शन भी मंगवाए। परिजनों का कहना है कि पूरी डिलीवरी केवल नर्सिंग स्टाफ ने कराई, जबकि कोई चिकित्सक मौजूद नहीं था।
नवजात को नही मिला समुचित उपचार
आरोप है, कि जन्म के बाद नवजात नहीं रोया, लेकिन करीब एक घंटे तक उसे समुचित उपचार नहीं मिला। बाद में हालत गंभीर बताकर शाम छह बजे सैफई पीजीआई रेफर कर दिया गया, जहां एनआईसीयू में भर्ती करने के बावजूद रात करीब 12 बजे उसकी मौत हो गई। परिजनों का दावा है कि पीजीआई पहुंचने पर बच्चे के सिर पर नाखून जैसे निशान और पैर में चोट भी मिली।
तीन सदस्यीय जांच समिति की गई गठित
घटना के बाद सीएचसी अधीक्षक डॉ. सैफ ने बताया, कि नवजात की धड़कन चल रही थी, लेकिन वह रो नहीं रहा था, इसलिए तत्काल रेफर किया गया। उन्होंने कहा कि मौत के कारणों और लगाए गए सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए डॉ. अर्चना, डॉ. ललित और गौरव तिवारी की तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी गई है। रिपोर्ट के आधार पर दोषी पाए जाने पर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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