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कोर्ट में पहुंचा बीमा कंपनी का मामला

बीमा कंपनी ने ठुकराया 12 लाख का क्लेम, अदालत ने दिलाए करीब 15 लाख रुपये

बांदा में एक हादसे के दौरान क्षतिग्रस्त डंपर के करीब 12 लाख रुपये के बीमा क्लेम को कंपनी ने दस्तावेजी विसंगतियों के आधार पर खारिज कर दिया था। स्थायी लोक अदालत ने डंपर मालिक के पक्ष में फैसला सुनाया है

बीमा कंपनी ने ठुकराया 12 लाख का क्लेम अदालत ने दिलाए करीब 15 लाख रुपये

कोर्ट में पहुंचा बीमा कंपनी का मामला |

बांदा: उत्तर प्रदेश के बांदा में एक हादसे के दौरान डंपर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। मालिक ने बीमा कंपनी से करीब 12 लाख रुपये का क्लेम मांगा, लेकिन कंपनी ने कई सवाल और दस्तावेजी विसंगतियां गिनाकर दावा खारिज कर दिया। मामला स्थायी लोक अदालत पहुंचा तो बीमा कंपनी की दलीलें कमजोर पड़ गईं। अदालत ने डंपर मालिक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए ब्याज समेत करीब 15 लाख रुपये भुगतान का आदेश दिया।

मरम्मत में खर्च हुए 11,97,144 रुपये

स्वराज कॉलोनी, सिविल लाइंस निवासी जय सिंह का डंपर संख्या UP-90-T-8673 आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी से बीमित था। बीमा पॉलिसी 4 मार्च 2022 से 3 मार्च 2023 तक प्रभावी थी। 12 मार्च 2022 की शाम फतेहपुर के चौफेरवा के पास सामने से आए तेज रफ्तार ट्रक ने डंपर में जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में डंपर का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। डंपर को कानपुर के अधिकृत सर्विस सेंटर ले जाया गया, जहां मरम्मत में 11,97,144 रुपये खर्च हुए। इसके बाद मालिक ने बीमा कंपनी से क्षतिपूर्ति की मांग की।

जांच एजेंसी ने हादसे को बताया संदिग्ध

बीमा कंपनी ने क्लेम खारिज करते हुए चालक और मालिक के बयानों में अंतर, हेल्पर की मौजूदगी, एफआईआर न होने, बिलों और सर्विस सेंटर की गेट एंट्री में अंतर जैसी कई आपत्तियां उठाईं। जांच एजेंसी ने भी हादसे को संदिग्ध बताते हुए फोरेंसिक जांच की सिफारिश की थी, लेकिन फोरेंसिक जांच कराए बिना ही क्लेम निरस्त कर दिया गया।

चालक को चोट न लगना फर्जी दुर्घटना का सबूत नहीं

स्थायी लोक अदालत ने मामले के साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद माना कि दुर्घटना और डंपर के क्षतिग्रस्त होने के तथ्य सामने हैं। हादसे को संदिग्ध बताने वाली जांच रिपोर्ट के समर्थन में पर्याप्त ठोस साक्ष्य नहीं मिले। अदालत ने स्पष्ट किया कि चालक को गंभीर चोट न आना अकेले हादसे को फर्जी साबित नहीं करता। 

एफआईआर न होना क्लेम खारिज करने का आधार नहीं

इसी तरह एफआईआर न होना या बिल और गेट एंट्री में एक दिन का अंतर भी पूरे बीमा क्लेम को खारिज करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है।
स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष विवेक कुमार गुप्ता, वरिष्ठ सदस्य डॉ. ब्रह्मदत्त सिंह और सदस्या शिवांगी शुक्ला ने बीमा कंपनी की आपत्तियों को अपर्याप्त मानते हुए डंपर मालिक के पक्ष में फैसला सुनाया। 

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