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रोहिंग्या होने के आरोप पर बोले-धुमंतू हैं हम

SIR में खुलासा–50 परिवार के पास कई आधार कार्ड

यहां एसआईआर सर्वे के दौरान पता चला कि पनागर विधानसभा के ग्राम हिनौतिया में सरकारी जमीन पर 50 से अधिक परिवार तंबू लगाकर रह रहे हैं।

sir में खुलासा–50 परिवार के पास कई आधार कार्ड

SIR में खुलासा–50 परिवार के पास कई आधार कार्ड

तंबू लगाकर रह रहे थे जबलपुर में 

रोहिंग्या होने के आरोप पर बोले-धुमंतू हैं हम

प्राइम न्यूज नेटवर्क

जबलपुर। यहां एसआईआर सर्वे के दौरान पता चला कि पनागर विधानसभा के ग्राम हिनौतिया में सरकारी जमीन पर 50 से अधिक परिवार तंबू लगाकर रह रहे हैं। इनके पास कई स्थानों के आधार कार्ड हैं। हिंदू संगठन की शिकायत पर जिला प्रशासन ने पुलिस के साथ मिलकर कार्रवाई की है। मंगलवार को सरकारी जमीन से कब्जा हटाया गया। हिंदू संगठन का आरोप है कि रोहिंग्या औऱ बांग्लादेशी सरकारी जमीन पर कब्जा करके यहां रह रहे हैं। वे सरकारी योजनाओं का भी लाभ ले रहे हैं। उधर, प्रशासन ने सरकारी जमीन से बेदखल किया है। पर वे लोग कर रहे हैं कि वे धुमंतू बंजारा है, न कि रोहिंग्या। करीब 10 दिन पहले हिंदू संगठन को पता चला कि  जबलपुर से करीब 25 किमी दूर बरेला थाना के ग्राम होनोतिया में कुछ लोग बाहर से आकर बस गये हैं।  इन लोगों ने तंबू लगाये हैं, कार भी रखी है। मौके पर जाकर कुछ लोगो ने बात की तो उनकी भाषा अलग लगी। उनके पास का आधार कार्ड देखे तो एक व्यक्ति का कार्ड तीन जगह से बने हुए थे। संगठन ने बरेला थाने  में शिकायत की और मांग की कि  सरकारी जमीन पर कब्जा करने वाले रोहिंग्या, बाग्लादेशी , को तुरंत हटाया जाए। मौके पर प्रशासन और पुलिस की टीम ने जांच की तो पता चला कि घुमंतू  बंजारा लोग हैं, जो हमेशा घूमते रहते हैं। पिछले कुछ साल से हिनोतिया गांव में ही बस गये थे। यह भी बताया जाता है कि इन लोगों ने गांव में ही रहकर काम करना शुरु कर दिया था। कुछ ग्राम पंचायत से ठेका लेकर काम कर रहे हैं।

प्रसासन सरकारी जमीन से इन्हें हटाने में जुटा

प्रशासन ने जांच में पाया कि गांव के बाहर जिस जमीन पर इन लोगों ने कब्जा कर तंबू लगाया था, वह जमीन सरकारी है। प्रशासन पुलिस के साथ मिल कर उन्हें सरकारी जमीन से बेदखल कर रही है। इधर, विहिप के प्रचार प्रमुख सुमित सिंह ठाकुर ने इनके दस्तावेज की जांच की मांग की है।

उधर, जबलपुर के कलेक्टर राघलेंद्र सिंह ने बताया कि जिन लोगों ने जमीन पर कब्जा किया है। वह जमीन शासकीय है। उन्हें पहले नोटिस दिया गया। बाद में उन लोगों ने स्वयं ही जमीन खाली नहीं की तो उन्हें हटा दिया गया। कुछ लोगों का यह  आरोप है  कि ये रोहिंग्या या बाग्लादेशी हैं। इसकी जांच करवाई जाए।

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