जयराम रमेश ने राजनाथ सिंह के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष का काम विरोध करना, पर्दाफाश करना और पद से हटाना है।
नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद जयराम रमेश ने शुक्रवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आरोपों पर पलटवार किया। उन्होंने लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका को लेकर पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के विचारों का हवाला देते हुए कहा कि विपक्ष का काम विरोध करना, पर्दाफाश करना और पद से हटाना है। उनका यह बयान राजनाथ सिंह के उस आरोप के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर विरोध प्रदर्शनों के जरिए देश में राजनीतिक अशांति फैलाने और सत्ता परिवर्तन की कोशिश करने का आरोप लगाया था।
प्रणब मुखर्जी के बयान का दिया हवाला
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि रक्षा मंत्री को पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के विचार याद रखने चाहिए। उन्होंने कहा, "रक्षा मंत्री को यह याद दिलाने की जरूरत है कि 2019 में भारत रत्न से सम्मानित पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी अक्सर क्या कहते थे: लोकतंत्र में विपक्ष का काम विरोध करना, पर्दाफाश करना और पदच्युत करना है।" रमेश ने इस बयान के जरिए लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष की भूमिका और सरकार के प्रति उसकी जवाबदेही को रेखांकित किया।
राजनाथ सिंह ने कांग्रेस पर लगाए थे आरोप
जयराम रमेश की यह प्रतिक्रिया रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर चुनाव आयोग के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों का इस्तेमाल राजनीतिक अशांति फैलाने के लिए करने का आरोप लगाया था। राजनाथ सिंह ने दावा किया था कि कुछ विपक्षी नेता बांग्लादेश में हुई घटनाओं से प्रेरित होकर भारत में सत्ता परिवर्तन की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष युवाओं को अव्यवस्था की राजनीति में मोहरे के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।
युवाओं को राजनीतिक टकराव में इस्तेमाल करने का आरोप
राजनाथ सिंह ने कहा था कि दिल्ली में हाल के घटनाक्रम कई गंभीर सवाल खड़े करते हैं। उनके मुताबिक, कांग्रेस और उसके सहयोगी दल युवाओं की ऊर्जा को रचनात्मक गतिविधियों और राष्ट्र निर्माण में लगाने के बजाय राजनीतिक टकराव तथा अराजकता फैलाने के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग बांग्लादेश की घटनाओं से प्रेरणा लेकर सत्ता परिवर्तन चाहते हैं और सरकार गिराने की मांग कर रहे हैं। सिंह ने इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने और देश में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश बताया। यह राजनीतिक बयानबाजी ऐसे समय में हो रही है, जब विपक्षी नेता, इंडिया ब्लॉक के दल और छात्र संगठन चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। राजनाथ सिंह ने आरोप लगाया था कि विपक्ष चुनावी सुधारों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मुद्दे को सरकार के खिलाफ राजनीतिक माहौल बनाने के लिए इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने कहा था कि संवैधानिक संस्थाओं को राजनीतिक हितों के लिए निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। वहीं, जयराम रमेश ने प्रणब मुखर्जी के विचारों का हवाला देकर विपक्ष के विरोध और सरकार को जवाबदेह ठहराने की भूमिका पर जोर दिया। दोनों नेताओं के बयानों के बाद चुनाव आयोग और एसआईआर को लेकर सत्तापक्ष तथा विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
{एएनआई}
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