बिहार की सियासत में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिल रहा है। जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर खुद बांकीपुर विधानसभा सीट से उपचुनाव के मैदान में उतरने जा रहे हैं।
पटना (बिहार)। बिहार की सियासत में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिल रहा है। जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर खुद बांकीपुर विधानसभा सीट से उपचुनाव के मैदान में उतरने जा रहे हैं। उम्मीदवार बनाए जाने के बाद रविवार को प्रशांत किशोर ने इसे बिहार में एक "नयी तरह की राजनीति" की शुरुआत करार दिया है।
क्या है बांकीपुर का सियासी इतिहास और प्रशांत किशोर की चुनौती?
बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र को लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी (BJP) का एक मजबूत और अभेद्य किला माना जाता रहा है। इस हाई-प्रोफाइल सीट से खुद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन साल 2010 से लगातार प्रतिनिधित्व करते आ रहे थे। हालांकि, प्रशांत किशोर ने इसे किसी पार्टी का गढ़ मानने से साफ इनकार कर दिया है। पीके ने इस धारणा को खारिज करते हुए पुरजोर शब्दों में कहा कि यह किसी नेता या दल का नहीं, बल्कि बिहार की जनता का असली गढ़ है।
पत्रकारों से बातचीत करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा, "हम इसे बिहार में एक नए किस्म की राजनीति की शुरुआत के रूप में देख रहे हैं। यह किसी का व्यक्तिगत गढ़ नहीं है, यह बिहार के लोगों का गढ़ है। स्थितियां निश्चित रूप से बदलेंगी। लोगों को सबसे बेहतर उम्मीदवार को वोट देना चाहिए, जो इस नई राजनीति की शुरुआत का प्रतिनिधित्व करता हो।"

अकेले चुनाव लड़ने का फैसला और गठबंधन पर रुख
जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने किसी भी दल के साथ गठबंधन में उपचुनाव लड़ने की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी केवल कुछ सीटें जीतने के लिए चुनाव नहीं लड़ रही है, बल्कि एक व्यापक राजनीतिक आंदोलन की शुरुआत करने जा रही है।
प्रशांत किशोर ने आगे कहा, "हम महज विधानसभा सीटों के लिए नहीं लड़ रहे हैं, बल्कि राज्य में एक नए राजनीतिक आंदोलन की शुरुआत करने के लिए मैदान में हैं। जैसे ही हम इस चुनाव में उतर रहे हैं, बिहार के मतदाताओं पर राज्य के लिए एक नई शुरुआत करने की बड़ी जिम्मेदारी आ गई है।" गठबंधन के सवाल पर उन्होंने कहा, "हम यह चुनाव अकेले लड़ रहे हैं और किसी भी अन्य दल के साथ हमारा कोई गठबंधन नहीं है। हालांकि, अगर किसी को लगता है कि उन्हें इस मुहिम में मदद करनी चाहिए, तो मैं उनके समर्थन का स्वागत करता हूँ।"
क्यों खाली हुई बांकीपुर सीट और क्या है पूरा चुनावी शेड्यूल?
बांकीपुर विधानसभा सीट तब खाली घोषित की गई थी, जब यहां के मौजूदा विधायक नितिन नवीन बिहार से राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो गए। इसके बाद निर्वाचन आयोग ने इस सीट पर उपचुनाव कराने का फैसला लिया है। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने गुरुवार को देश के तीन राज्यों—बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात की तीन हाई-प्रोफाइल विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के कार्यक्रमों की घोषणा की थी। इस घोषणा में बिहार की बांकीपुर, मध्य प्रदेश की दतिया और गुजरात की मणजालपुर सीट शामिल है।
(यह खबर ANI से सीधे संपादित की गई है।)
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