सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुयान ने न्यायाधीशों की नियुक्ति और तबादलों से जुड़ी कॉलेजियम प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता की जरूरत बताई है।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुयान ने न्यायाधीशों की नियुक्ति और तबादलों से जुड़ी कॉलेजियम प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता की जरूरत बताई है। उन्होंने कहा कि नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि अदालतों में क्या हो रहा है और उनके न्यायाधीश कौन होंगे।
कॉलेजियम प्रक्रिया में गोपनीयता पर उठाए सवाल
न्यायमूर्ति भुयान ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा न्यायाधीशों की पदोन्नति और तबादलों से जुड़े विचार-विमर्श काफी हद तक गोपनीय रहते हैं। उन्होंने कहा कि किसी सिफारिश को अस्वीकार करने या लंबित रखने के कारणों का पूरी तरह खुलासा बहुत कम किया जाता है। उन्होंने कहा कि न्यायिक पारदर्शिता के सिद्धांत के तहत नियुक्ति प्रक्रिया में स्पष्टता होना जरूरी है।
JALDI रिपोर्ट जारी होने के मौके पर रखे विचार
न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुयान ने यह बातें विधि सेंटर फॉर लीगल पॉलिसी की ओर से तैयार की गई "न्यायिक पारदर्शिता सूचकांक: भारत और उच्च न्यायालयों द्वारा सूचना के प्रकटीकरण का आकलन" रिपोर्ट के विमोचन के दौरान कहीं। यह रिपोर्ट भारतीय उच्च न्यायपालिका में पारदर्शिता व्यवस्था का आकलन करने वाला पहला व्यवस्थित अध्ययन बताया गया है। इसमें सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट की न्यायिक प्रक्रियाओं, प्रशासनिक व्यवस्था और सूचना के सार्वजनिक प्रकटीकरण का मूल्यांकन किया गया है।
कॉलेजियम में कारणों के खुलासे की वकालत
न्यायमूर्ति भुयान ने कहा कि हाल के कुछ कॉलेजियम प्रस्तावों में न्यायाधीशों की नियुक्ति की सिफारिश के कारणों का उल्लेख नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि पहले के प्रस्तावों में कुछ कारण बताए जाते थे, लेकिन हाल के तीन प्रस्तावों में सिफारिश के पीछे कोई कारण दर्ज नहीं किया गया। उन्होंने इसे पारदर्शिता के सिद्धांत के विपरीत बताया।
न्यायपालिका की आंतरिक प्रक्रिया की जांच जरूरी
न्यायमूर्ति भुयान ने कहा कि जिस तरह न्यायिक फैसलों और कार्यप्रणाली की समीक्षा होती है, उसी तरह न्यायपालिका की अपनी गठनात्मक प्रक्रियाओं की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को जनता के प्रति जवाबदेह और पारदर्शी बनाने के लिए संस्थागत सुधार जरूरी हैं।
खुले न्याय के सिद्धांत पर दिया जोर
अपने संबोधन में न्यायमूर्ति भुयान ने "खुले न्याय" के सिद्धांत का जिक्र करते हुए कहा कि पारदर्शिता किसी भी न्याय व्यवस्था की मजबूती के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता शासन का केवल एक गुण नहीं, बल्कि उसकी मूल आवश्यकता है।
पारदर्शिता बढ़ाने के प्रयासों की सराहना
न्यायमूर्ति भुयान ने न्यायिक पारदर्शिता सूचकांक रिपोर्ट की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थागत पारदर्शिता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि भारतीय न्यायपालिका ने पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, लेकिन व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए अभी काफी काम बाकी है।
(एएनआई)
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