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वाल्मीकि जयंती पर अर्पित किए श्रद्धासुमन

केशव प्रसाद मौर्य ने महर्षि वाल्मीकि जयंती पर अर्पित किए श्रद्धासुमन, रामायण को बताया भारतीय संस्कृति का अमूल्य ग्रंथ

लखनऊ में महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने उनके चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की और रामायण को प्रेरणा देने वाला अमूल्य ग्रंथ बताया।

केशव प्रसाद मौर्य ने महर्षि वाल्मीकि जयंती पर अर्पित किए श्रद्धासुमन रामायण को बताया भारतीय संस्कृति का अमूल्य ग्रंथ

उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य |

लखनऊ। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सोमवार को अपने सरकारी कैम्प कार्यालय, 7-कालिदास मार्ग, लखनऊ में आदिकवि महर्षि वाल्मीकि जी की जयंती पर उनके चित्र पर माल्यार्पण कर पुष्पांजलि अर्पित की और श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उन्हें नमन किया। इस अवसर पर उन्होंने देश एवं प्रदेशवासियों को महर्षि वाल्मीकि जयंती की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

महर्षि वाल्मीकि का भारतीय साहित्य में अतुलनीय योगदान

उप मुख्यमंत्री मौर्य ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्श चरित्र को लिपिबद्ध कर सम्पूर्ण विश्व को कालजयी महाकाव्य ‘रामायण’ प्रदान करने वाले महर्षि वाल्मीकि का भारतीय संस्कृति और साहित्य में अतुलनीय योगदान है। उनकी रचना ने समाज को सत्य, धर्म, मर्यादा, कर्तव्य और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी है। महर्षि वाल्मीकि ने अपनी प्रज्ञा और ज्ञान के आलोक से भगवान श्रीराम की गौरवगाथा को जन-जन तक पहुंचाया।

श्रीराम के आदर्श युगों-युगों तक करते रहेंगे मानवता का मार्गदर्शन

मौर्य ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और आदर्श जीवन-दर्शन का अमूल्य ग्रंथ है। इसमें वर्णित भगवान श्रीराम का जीवन और उनके आदर्श युगों-युगों तक मानवता का मार्गदर्शन करते रहेंगे। भगवान श्रीराम के जीवन दर्शन को रेखांकित करते हुए महर्षि वाल्मीकि ने सामाजिक जीवन-मूल्यों और आदर्शों को स्थायी आधार प्रदान किया, जो आज भी हम सभी के लिए अनुकरणीय और प्रेरणादायक हैं।

समतामूलक समाज के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ें

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन हमें धर्म का अनुसरण करने, सत्य के मार्ग पर चलने और सदाचारपूर्ण आचरण अपनाने की सीख देता है। महर्षि वाल्मीकि की शिक्षाओं और रामायण में निहित आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात कर हम समाज में प्रेम, करुणा, परस्पर सम्मान और सामाजिक समरसता को मजबूत कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि के विचारों और भगवान श्रीराम के आदर्शों से प्रेरणा लेकर समतामूलक समाज के निर्माण की दिशा में निरंतर आगे बढ़ना चाहिए। उनके जीवन-संदेश और रचनाएं आने वाली पीढ़ियों को भी सत्य, न्याय, कर्तव्यनिष्ठा और मानवीय मूल्यों के प्रति प्रेरित करती रहेंगी।

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