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सीवेज से भरा लहारपुर डैम बना जहरीला..

सीवेज से भरा लहारपुर डैम बना जहरीला, कैंसर का खतरा बढ़ा

MP News : भोपाल। यहां के लहारपुर डैम में बिना शोधन के सीवेज पहुंचने से यह जहरीले नाले में तब्दील हो गया है। 80 करोड़ रुपये की लागत से बने..

सीवेज से भरा लहारपुर डैम बना जहरीला कैंसर का खतरा बढ़ा

सीवेज से भरा लहारपुर डैम बना जहरीला, कैंसर का खतरा बढ़ा |

MP News : भोपाल। यहां के लहारपुर डैम में बिना शोधन के सीवेज पहुंचने से यह जहरीले नाले में तब्दील हो गया है। 80 करोड़ रुपये की लागत से बने इस डैम का पानी सिंचाई में उपयोग हो रहा है, जिससे कैंसर का खतरा, फसलों में ज़हर और बेतवा नदी के प्रदूषण की आशंका जताई जा रही है।

कभी वर्षा जल संरक्षण के उद्देश्य से बनाया गया भोपाल के बागमुगालिया क्षेत्र का लहारपुर डैम अब एक विशाल सीवेज कुंड में बदल चुका है। इससे पर्यावरण और जनस्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई है, जिनमें कैंसर जैसी घातक बीमारियों का खतरा भी शामिल है।

डैम का पानी काला, बदबूदार व जहरीला हो गया है

लगभग 80 करोड़ रुपये की लागत से बने इस डैम में शहर के चार प्रमुख नालों और कई छोटे नालों का बिना शोधन किया गया गंदा पानी सीधे डाला जा रहा है। डैम का पानी अब काला, बदबूदार और अत्यधिक जहरीला हो चुका है।

जलाशय पर हुए शोध

विशेषज्ञों का कहना है कि इस जलाशय का प्रदूषण हजारों लोगों के लिए सीधे तौर पर कैंसर का खतरा पैदा करता है। डैम की भयावह स्थिति का खुलासा डॉ. साधना मल्होत्रा सिंह के पीएचडी शोध “लहारपुर झील (भोपाल) का पारिस्थितिक-विषविज्ञान मूल्यांकन: संरक्षण एवं प्रबंधन के संदर्भ में” में किया गया है।

बीएमसी की लापरवाही

भोपाल की बढ़ती आबादी और विस्तारित सीवेज नेटवर्क के बावजूद भोपाल नगर निगम (बीएमसी) ने अपशिष्ट जल के उचित उपचार की कोई ठोस योजना नहीं बनाई। परिणामस्वरूप हबीबगंज अंडरब्रिज, साकेत नगर, एम्स-साकेत नगर और भेल क्षेत्र सहित कई इलाकों का सीवेज सीधे लहारपुर डैम में मोड़ा जा रहा है।

600 मीटर दूर से महसूस होता है बदबू

करीब एक किलोमीटर में फैला और लगभग 25 मीटर गहरा यह जलाशय अब इतना बदबूदार हो चुका है कि इसकी दुर्गंध 600 मीटर दूर तक महसूस की जा सकती है। 

डैम की भयावह स्थिति के बावजूद इसका पानी अमरावतखुर्द, लहारपुर, बागमुगालिया, बागसेवनिया, बरखेड़ा पठानी और पिपनिया पेंडे खान जैसे गांवों की लगभग 800 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई में इस्तेमाल किया जा रहा है।

बदबूदार पानी में उगाई गई सब्जी बाजारों में बेचे जात हैं

इस पानी से उगाई गई सब्जियां, गेहूं और धान स्थानीय बाजारों में बेचे जा रहे हैं, जो राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) द्वारा सीवेज के पानी से सिंचाई पर लगाए गए प्रतिबंध का स्पष्ट उल्लंघन है।

बेतवा नदी पर भी खतरा

लहारपुर डैम से छोड़ा गया प्रदूषित पानी अंततः भोजपुर के पास बेतवा नदी में मिल जाता है। इससे नदी का प्रदूषण बढ़ रहा है और गाद जमाव (सिल्टेशन) भी तेज हो रहा है, जिससे शहर की सीमाओं से बाहर तक पर्यावरणीय नुकसान फैल रहा है।

कैंसर के खतरे की चेतावनी

पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. सुभाष सी. पांडे ने चेतावनी दी है कि भारी धातुओं (हेवी मेटल्स) के प्रदूषण ने जलजीवों को पूरी तरह नष्ट कर दिया है और पानी की सतह पर जहरीला झाग बन रहा है।
उन्होंने कहा, “ऐसे प्रदूषक गंभीर बीमारियों, विशेषकर कैंसर का कारण बन सकते हैं। इस पानी का उपयोग सिंचाई के लिए बिल्कुल नहीं किया जाना चाहिए।

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