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₹9,383 से बढ़ाकर ₹21,500 करने की मांग

मध्य प्रदेश: स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर आयुर्वेद छात्रों का हंगामा, गेट पर जड़ा ताला

विद्यार्थियों का तर्क है कि बीएएमएस और एमबीबीएस इंटर्न की ड्यूटी एवं जिम्मेदारियों को देखते हुए दोनों के मानदेय में अंतर नहीं होना चाहिए। वे एमबीबीएस इंटर्न के बराबर स्टाइपेंड देने की मांग कर रहे हैं।

मध्य प्रदेश स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर आयुर्वेद छात्रों का हंगामा गेट पर जड़ा ताला

उज्जैन: आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे करीब 200 छात्र-छात्राओं ने सोमवार को कॉलेज और अस्पताल के मुख्य द्वार पर तालाबंदी कर दी। पिछले सात दिनों से धरना दे रहे विद्यार्थियों का कहना है कि बार-बार मांग उठाने के बावजूद उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। तालाबंदी के कारण सुबह अस्पताल पहुंचने वाले डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों और मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

₹9,383 से बढ़ाकर ₹21,500 करने की मांग

प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों के अनुसार, मध्यप्रदेश में बीएएमएस इंटर्न को वर्तमान में 9,383 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड दिया जा रहा है। छात्र इसे बढ़ाकर 21,500 रुपये प्रतिमाह करने की मांग कर रहे हैं। विद्यार्थियों का तर्क है कि बीएएमएस और एमबीबीएस इंटर्न की ड्यूटी एवं जिम्मेदारियों को देखते हुए दोनों के मानदेय में अंतर नहीं होना चाहिए। वे एमबीबीएस इंटर्न के बराबर स्टाइपेंड देने की मांग कर रहे हैं।

सद्बुद्धि यज्ञ और रक्तदान से भी नहीं बनी बात

स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर छात्र-छात्राएं पिछले सात दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। इस दौरान विद्यार्थियों ने धरना-प्रदर्शन और नारेबाजी के साथ सद्बुद्धि यज्ञ तथा रक्तदान जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए। इसके बावजूद मांग पर निर्णय नहीं होने से विद्यार्थियों में नाराजगी बढ़ गई। सोमवार को उन्होंने कॉलेज और अस्पताल के मुख्य द्वार पर तालाबंदी कर अपना विरोध जताया।

लिखित आदेश की मांग पर अड़े विद्यार्थी

प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि स्टाइपेंड बढ़ाने के संबंध में लिखित आदेश चाहिए। विद्यार्थियों ने सरकार से मांग की है कि बीएएमएस इंटर्न का स्टाइपेंड बढ़ाकर 21,500 रुपये प्रतिमाह किया जाए और इसे तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। वहीं, तालाबंदी के कारण अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों को हुई परेशानी ने विरोध प्रदर्शन के बीच स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। अब देखना होगा कि विद्यार्थियों की मांग पर जिम्मेदार अधिकारी और सरकार क्या निर्णय लेते हैं।

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