गैंगस्टर रविंद्र सिंह उर्फ रवि नागर उर्फ रवि काना के खिलाफ बी-वारंट जारी होने के बावजूद बांदा के जिला कारागार से बृहस्पतिवार शाम उसे रिहा कर दिया गया था।
स्क्रैप माफिया रवि काना की जेल से गुपचुप रिहाई पर कोर्ट खफा, कारापाल निलंबित
जेल प्रशासन ने कहा, देर से मिला वारंट
लखनऊ ।
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने कुख्यात स्क्रैप माफिया रवि काना की रिहाई के मामले में बांदा जिला जेल के कारपाल विक्रम सिंह यादव निलंबित कर दिया है। विक्रम सिंह यादव पर आरोप है कि उन्होंने नोएडा के कुख्यात क्रिमिनल रवि काना को जेल से रिहा कर दिया, जबकि नोएडा कोर्ट ने उसे B वारंट पर तलब कर रखा था। यूपी के अपर महानिरीक्षक (प्र०) कारागार प्रशासन एवं सुधार धर्मेन्द्र सिंह ने निलंबन आदेश जारी किया। हालाँकि बांदा जेल प्रशासन का कहना है कि कुख्यात स्क्रैप माफिया रवि काना की रिहाई शाम 6.39 बजे हो गई थी, जबकि नोएडा कोर्ट का वारंट रात पौने 8 बजे प्राप्त हुआ था।
गैंगस्टर रविंद्र सिंह उर्फ रवि नागर उर्फ रवि काना के खिलाफ बी-वारंट जारी होने के बावजूद बांदा के जिला कारागार से बृहस्पतिवार शाम उसे रिहा कर दिया गया था। इस मामले में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये गौतमबुद्ध नगर के कोर्ट में उसकी पेशी भी हुई थी। गौतमबुद्धनगर की सीजेएम ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए बांदा के जेल अधीक्षक को स्पष्टीकरण के साथ आख्या 6 फरवरी तक तलब किया है। कोर्ट ने इसे एक गंभीरता से लेते हुए कहा कि इस मामले में कारापाल के खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए।
नोएडा में दर्ज हैं कई एफआईआर
मालूम हो कि नोएडा के सेक्टर-63 थाने में रवि काना के खिलाफ इस साल कई एफआईआर दर्ज की गई थी। तब वह अन्य मामलों में जिला कारागार बांदा में बंद था। उसे बी-वारंट के जरिये कोर्ट में तलब किया गया और विवेचक ने रिमांड मांगा था। इसके बावजूद उसी दिन शाम को आरोपी को जेल से रिहा कर दिया गया। कुख्यात अपराधी रवि काना नोएडा का सबसे बड़ा कबाड़ी माफिया माना जाता है। सुन्दर भाटी के जेल जाने के बाद इसका गैंग सक्रिय हुआ था। फिलहाल सुन्दर भाटी भी जेल से बाहर है।