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मध्य प्रदेश का पहला बो-स्ट्रिंग फ्लाईओवर

इंदौर में इंजीनियरिंग का अद्भुत नमूना, मध्य प्रदेश का पहला बो-स्ट्रिंग फ्लाईओवर

इंदौर। शहर के लवकुश चौराहे पर बन रहे इस फ्लाईओवर ने एक महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर लिया है। हाल ही में...

इंदौर में इंजीनियरिंग का अद्भुत नमूना मध्य प्रदेश का पहला बो-स्ट्रिंग फ्लाईओवर

इंदौर में इंजीनियरिंग का अद्भुत नमूना, मध्य प्रदेश का पहला बो-स्ट्रिंग फ्लाईओवर |

इंदौर। शहर के लवकुश चौराहे पर बन रहे इस फ्लाईओवर ने एक महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर लिया है। हाल ही में, यहाँ 23 मीटर की ऊँचाई पर करीब 400 मीट्रिक टन वजनी पहली विशाल स्टील गर्डर (बो-स्ट्रिंग आर्क) को सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया है। यह फ्लाईओवर जमीन से 23 मीटर ऊँचा है, जो इसे इंदौर का सबसे ऊँचा फ्लाईओवर पॉइंट है। यह नीचे से गुजर रही मेट्रो लाइन और पुराने पुल के भी ऊपर से गुजरेगा। स्थापित की गई स्टील गर्डर की लंबाई 65 मीटर है और इसका कुल वजन 400 टन है।

​इस तरह जोड़ा गया

चौराहे के ठीक बीच में कोई पिलर नहीं दिया गया है, ताकि नीचे ट्रैफिक का दबाव न बढ़े और वाहन आसानी से गुजर सकें। इसे 'बो-स्ट्रिंग' स्पान तकनीक से जोड़ा गया है। इस डबल-डेकर फ्लाईओवर की कुल लंबाई 1452 मीटर है।

​यातायात को मिलेगी राहत

​यह फ्लाईओवर इंदौर-उज्जैन रोड पर स्थित है। इसके शुरू होने से लवकुश चौराहे पर लगने वाले भीषण जाम से मुक्ति मिलेगी। इसके साथ ​इंदौर से उज्जैन जाने वाले यात्रियों का समय बचेगा। अनुमान के मुताबिक, प्रतिदिन करीब 2 लाख वाहनों को इससे सुगम रास्ता मिलेगा। यह आगामी सिंहस्थ 2028 के लिहाज से भी एक बेहद महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा (Infrastructure) है।

जून 2026 तक जनता के लिए खोला जाएगा

​इस भारी-भरकम गर्डर को स्थापित करने में करीब 12 घंटे का समय लगा, जिसमें तीन विशेष विंच मशीनों का उपयोग किया गया। इंदौर विकास प्राधिकरण का लक्ष्य है कि इस फ्लाईओवर को जून 2026 तक पूरी तरह तैयार कर जनता के लिए खोल दिया जाए। इस फ्लाईओवर का निर्माण तीन स्तरों (थ्री-लेयर) पर हो रहा है—सबसे नीचे सामान्य सड़क, उसके ऊपर मेट्रो और सबसे ऊपर यह फ्लाईओवर।

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