दमोह। मध्य प्रदेश के सरकारी संजीवनी क्लिनिकों में फर्जी डॉक्टर मरीजों का इलाज कर रहे हैं। दमोह और जबलपुर में रविवार को...
दमोह। मध्य प्रदेश के सरकारी संजीवनी क्लिनिकों में फर्जी डॉक्टर मरीजों का इलाज कर रहे हैं। दमोह और जबलपुर में रविवार को पकड़े गए 3 आरोपियों की जांच में खुलासा हुआ है कि उन्होंने दूसरे डॉक्टरों के मेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन नंबर और फर्जी एमबीबीएस (MBBS) डिग्री के आधार पर नौकरी हासिल की थी। खास बात यह है कि आरोपी करीब डेढ़ साल तक सरकारी क्लिनिक में पदस्थ रहे, लेकिन उनके दस्तावेजों का सत्यापन नहीं किया गया। मार्च 2026 में संविदा अवधि खत्म होने के बाद भी उनकी नियुक्ति बढ़ा दी गई।
जबलपुर व दमोह का मामला
दमोह के संजीवनी क्लिनिक में पदस्थ राजपाल गौर और डॉ. कुमार सचिन यादव के मेडिकल काउंसिल पंजीयन नंबर फर्जी पाए गए। इनमें से एक नंबर नर्मदापुरम में पदस्थ एक वास्तविक डॉक्टर का निकला। दोनों आरोपियों की निशानदेही पर जबलपुर के संजीवनी क्लिनिक में पदस्थ डॉ. अजय मौर्य की डिग्री भी फर्जी मिली। कोतवाली पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर मई तक रिमांड पर लिया है।
पकड़े गए फर्जी डॉक्टरों ने दिया रैकेट का सुराग, ऐसे 70 डॉक्टर
प्रारंभिक जांच में मामला केवल तीन डॉक्टरों तक सीमित नहीं दिख रहा है। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के मुताबिक, मध्य प्रदेश में 70 से ज्यादा फर्जी डॉक्टर पदस्थ होने की आशंका है। मुरैना में भी ऐसे 5 संदिग्ध डॉक्टरों की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी है।
आरोपियों के पास से मिले फर्जी दस्तावेज
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों के पास विभिन्न विश्वविद्यालयों और मेडिकल संस्थानों के दस्तावेज मिले हैं। प्रारंभिक जांच में इनमें से कई दस्तावेज फर्जी पाए गए हैं। रीवा मेडिकल कॉलेज और जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर के नाम का इस्तेमाल कर फर्जी डिग्रियां तैयार किए जाने की बात सामने आई है।
बड़ा रैकेट, दमोह से भोपाल तक जांच
दमोह एसपी आनंद कलादगी ने बताया कि यह बहुत बड़ा रैकेट है। जांच दमोह से लेकर भोपाल तक चल रही है। आरोपियों से पूछताछ में कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं और अन्य आरोपियों की तलाश के लिए टीमें बाहर भेजी गई हैं।
अफसर एक-दूसरे पर डाल रहे जिम्मेदारी
दस्तावेजों के सत्यापन को लेकर अधिकारी अब एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ रहे हैं। सीएमएचओ (CMHO) का कहना है कि सत्यापन भोपाल स्तर से होना था। एनएचएम (NHM) का कहना है कि जांच जिला स्तर पर होनी थी। वहीं दमोह सीएमएचओ डॉ. राजेश बजाज का कहना है कि दस्तावेजों का अंतिम सत्यापन भोपाल स्तर से होता है।
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