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पुणे में MPSC अभ्यर्थियों का विरोध मार्च

MPSC अभ्यर्थियों का पुणे में विरोध मार्च, पेपर लीक और अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग

MPSC अभ्यर्थियों ने पुणे में विरोध मार्च निकालकर परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, कथित पेपर लीक और अनियमितताओं की जांच तथा आयोग के अध्यक्ष-सचिव के इस्तीफे की मांग की।

mpsc अभ्यर्थियों का पुणे में विरोध मार्च पेपर लीक और अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग

MPSC Aspirants Protest in Pune Over Paper Leaks and Irregularities |

पुणे (महाराष्ट्र)। महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) के बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने सोमवार को पुणे में विरोध मार्च निकाला और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के साथ-साथ विभिन्न परीक्षाओं में कथित प्रश्नपत्र लीक तथा अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

अध्यक्ष-सचिव के इस्तीफे की मांग

प्रदर्शनकारियों ने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) के अध्यक्ष और सचिव के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि इन पदों पर तत्काल ‘‘बेदाग छवि’’ वाले अधिकारियों की नियुक्ति की जाए। मार्च ओंकारेश्वर मंदिर चौक से शुरू होकर पुणे जिला कलेक्ट्रेट पहुंचा। वहां प्रदर्शनकारियों ने एमपीएससी के कामकाज और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी विभिन्न मांगें उठाईं।

विधायकों ने दिया समर्थन

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार और कांग्रेस विधायक विश्वजीत कदम भी प्रदर्शनकारियों के साथ शामिल हुए और उनकी मांगों का समर्थन किया। पवार ने कहा कि सरकार को प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों की मांगें पूरी करनी चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि आयोग औषधि निरीक्षक (ग्रुप-बी) परीक्षा को लेकर उठाई गई आपत्तियों पर आठ दिनों के भीतर स्पष्टीकरण दे और कथित अनियमितताओं की जांच शुरू करे।

परीक्षा गड़बड़ी की जांच की मांग

अन्य मांगों में 2025 राज्य सेवा मुख्य परीक्षा और कृषि सेवा परीक्षा के वर्णनात्मक प्रश्नपत्रों के मूल्यांकन में कथित गड़बड़ियों की जांच की मांग भी शामिल थी। उन्होंने यह भी मांग की कि मुंबई अपराध शाखा द्वारा एमपीएससी को सौंपी गई प्रारंभिक जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए।

लेंडवे के कार्यकाल का ऑडिट

मुंबई अपराध शाखा मार्च में आयोजित एमपीएससी औषधि निरीक्षक (ग्रुप-बी) स्क्रीनिंग परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के मामले की जांच कर रही है। प्रदर्शनकारियों ने गिरफ्तार किए गए एमपीएससी के अवर सचिव अभिजीत लेंडवे के कार्यकाल के दौरान आयोजित सभी परीक्षाओं का फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की। उन्होंने लेंडवे और मामले में आरोपी एमपीएससी के दो अन्य सहायक अनुभाग अधिकारियों विश्वेश्वर दत्तात्रेय नकटे और गोपाल भट्टू मराठे के सेवा रिकॉर्ड और पदोन्नति के मानदंडों की विस्तृत जांच की भी मांग की।

ग्रुप-सी परीक्षा में पारदर्शिता की मांग

अभ्यर्थियों ने 25 अक्टूबर 2026 को होने वाली ग्रुप-सी (क्लर्क और टाइपिस्ट के लिए) प्रारंभिक परीक्षा को पूरी तरह पारदर्शी तरीके से आयोजित करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने स्टेनोग्राफर पद को फिर से बहाल करने की भी मांग की। पवार ने कहा कि राज्य सरकार को छात्रों की मांगें पूरी करनी चाहिए। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘यह कोई राजनीतिक आंदोलन नहीं है। यह सभी एमपीएससी अभ्यर्थियों के नेतृत्व में चलाया जा रहा आंदोलन है।’’

एमपीएस सी अध्यक्ष का स्पष्टीकरण

अपने इस्तीफे की मांग के बीच एमपीएससी अध्यक्ष विवेक भीमनवार ने पिछले सप्ताह कहा था कि औषधि निरीक्षक (ग्रुप-बी) परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने की घटना उनके आयोग का अध्यक्ष पद संभालने से पहले हुई थी। मुंबई पुलिस ने इस मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें परीक्षा में सातवां स्थान हासिल करने वाली एक महिला अभ्यर्थी भी शामिल है।

सुरक्षा के लिए समितियां गठित

भीमनवार के मुताबिक, आयोग ने ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए निवारक और सुरक्षा उपायों की सिफारिश करने हेतु एक उच्चस्तरीय आंतरिक समिति का भी गठन किया है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने भी परीक्षा प्रक्रिया में जरूरी सुधारों का सुझाव देने के लिए अलग से एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है।

नई परीक्षा सुधार समिति गठित

उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र में आदिवासी छात्रों और नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों ने खराब छात्रावास सुविधाओं, छात्रों की सुरक्षा और परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने जैसे मुद्दों को लेकर भी प्रदर्शन किए हैं। इसके बाद राज्य सरकार ने उनकी प्रमुख मांगों को स्वीकार करते हुए परीक्षाओं में सुधार के लिए एक नयी परीक्षा सुधार समिति गठित की है।

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