हाल ही में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने वर्ष 2024 के आंकड़ों के आधार पर देश में अपराध की स्थिति पर ताजा रिपोर्ट जारी की है।
भोपाल (मध्यप्रदेश)। हाल ही में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने वर्ष 2024 के आंकड़ों के आधार पर देश में अपराध की स्थिति पर ताजा रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में विभिन्न श्रेणियों में अपराध के आंकड़े चिंताजनक हैं।
महिलाओं के खिलाफ अपराध मामले में दिल्ली सबसे असुरक्षित
रिपोर्ट के मुताबिक, देश के 19 प्रमुख महानगरों में दिल्ली महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित शहर बनकर उभरा है।दिल्ली में 2024 में महिलाओं के खिलाफ 13,396 मामले दर्ज किए गए, जबकि 2023 में यह संख्या 13,366 थी।राज्यों में उत्तर प्रदेश महिला अपराध के मामले में पहले स्थान पर है, जबकि महाराष्ट्र दूसरे स्थान पर है।मध्य प्रदेश लगातार चौथे साल महिला अपराध के मामले में 5वें स्थान पर रहा है। यहाँ 2024 में कुल 32,832 मामले दर्ज हुए। यानि कि औसतन 90 मामले प्रतिदिन दर्ज हुए।
दुष्कर्म (Rape) के मामले
दुष्कर्म के मामलों में राजस्थान देश में पहले स्थान पर है।
राजस्थान में 4,871 मामले
उत्तर प्रदेश में 3,209 मामले
महाराष्ट्र में 3,091 मामले
मध्य प्रदेश में 3,061 मामले (मप्र इस सूची में चौथे स्थान पर है)
बुजुर्गों और ST वर्ग पर अत्याचार में मध्य प्रदेश नंबर-1
मध्य प्रदेश के लिए सबसे गंभीर आंकड़े बुजुर्गों और अनुसूचित जनजाति (ST) के खिलाफ होने वाले अपराधों में आए हैं। यहां राज्य देश में पहले पायदान पर है। SC वर्ग के खिलाफ अपराध में उत्तर प्रदेश (14,642 मामले) शीर्ष पर है, जबकि मध्य प्रदेश 7,765 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर है। बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों में उत्तर प्रदेश सबसे आगे है। यहां महाराष्ट्र 24,171 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर बना हुआ है। मध्य प्रदेश पिछले साल पहले नंबर पर था, लेकिन इस साल सुधार के साथ तीसरे स्थान पर आ गया है।
साइबर अपराध में मध्य प्रदेश की बढ़ रही चुनौती
मध्य प्रदेश में साइबर अपराध की चुनौती भी बढ़ती दिख रही है। वर्ष 2024 के दौरान 1,081 नए मामले दर्ज किए गए। पिछले लंबित मामलों को मिलाकर कुल 2,274 केस जांच के दायरे में थे, जिनमें से 767 का निपटारा हुआ और 1,507 जांच अभी भी लंबित हैं। पुलिस चार्जशीट दर 86.2% रही। कोर्ट में सजा की दर 47.9% दर्ज की गई। कुछ श्रेणियों में सुधार हुआ है, वहीं महिलाओं और कमजोर वर्गों की सुरक्षा अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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