राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने मानव तस्करी और साइबर धोखाधड़ी से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई करते हुए सोमवार को पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ में दो स्थानों पर छापेमारी की।
नई दिल्ली: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने मानव तस्करी और साइबर धोखाधड़ी से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई करते हुए सोमवार को पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ में दो स्थानों पर छापेमारी की। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह भारतीय युवाओं को अवैध रूप से म्यांमार भेजकर साइबर ठगी के लिए मजबूर करता था।
दो राज्यों में की गई तलाशी
एनआईए ने पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर और छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई फरवरी 2026 में तीन आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किए जाने के करीब पांच महीने बाद की गई। इस मामले में अंकित कुमार उर्फ अंकित भारद्वाज, इश्तिका अली उर्फ अली और लीसा नामक एक संदिग्ध चीनी नागरिक को आरोपी बनाया गया है। एनआईए ने इनके खिलाफ पंचकूला स्थित विशेष अदालत में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और उत्प्रवासन अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आरोपपत्र दाखिल किया है।
थाईलैंड में नौकरी का झांसा देकर भेजते थे म्यांमार
एनआईए की जांच के अनुसार, आरोपी भारतीय युवाओं को थाईलैंड में अच्छी नौकरी का लालच देते थे। इसके लिए ऑनलाइन इंटरव्यू कराए जाते थे, ताकि लोगों को भरोसा हो जाए कि उन्हें वैध रोजगार मिल रहा है। इसके बाद उन्हें थाईलैंड के रास्ते अवैध रूप से म्यांमार पहुंचाया जाता था।
साइबर ठगी करने के लिए किया जाता था मजबूर
जांच में पता चला कि म्यांमार पहुंचने के बाद पीड़ितों को साइबर स्कैम कंपनियों में काम करने के लिए मजबूर किया जाता था। उनसे फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल बनवाकर अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा के लोगों को नकली क्रिप्टोकरेंसी ऐप में निवेश करने के लिए फंसाने का काम कराया जाता था।
इंकार करने पर बनाया जाता था बंधक
एनआईए के मुताबिक, जो लोग साइबर ठगी करने से इनकार करते थे, उन्हें बंधक बनाकर प्रताड़ित किया जाता था। इतना ही नहीं, उन्हें रिहा करने के बदले भारी रकम भी वसूली जाती थी। एजेंसी इस पूरे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और उससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
एएनआई
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