जबलपुर। मध्य प्रदेश में लंबे समय से लंबित ओबीसी आरक्षण विवाद अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है।
जबलपुर। मध्य प्रदेश में लंबे समय से लंबित ओबीसी आरक्षण विवाद अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। हाईकोर्ट की जबलपुर मुख्यपीठ ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि इस मामले में अब और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और फैसला टालना अब संभव नहीं होगा।
अदालत ने शिड्यूल तय
अदालत ने इस संवेदनशील मुद्दे पर त्वरित समाधान के लिए एक विशेष शिड्यूल तय किया है। कोर्ट आगामी 27, 28 और 29 अप्रैल को लगातार तीन दिनों तक इस केस की सुनवाई करेगा। ओबीसी आरक्षण से जुड़ी सभी याचिकाओं पर एक साथ विस्तार से सुनवाई की जाएगी ताकि मामले का तार्किक अंत हो सके।
तैयारी के साथ आएं पक्षकार
मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण बातें कहीं। अदालत ने सभी संबंधित पक्षों को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे पूरी तैयारी के साथ आएं ताकि सुनवाई की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की रुकावट या बाधा न आए।
नहीं होगी सुनवाई स्थगित
कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि पहले दायर हस्तक्षेप याचिकाओं (Intervention Applications) के कारण पहले ही बहुत देरी हो चुकी है। अब ऐसी किसी भी नई स्थिति या देरी को स्वीकार नहीं किया जाएगा और न ही सुनवाई स्थगित की जाएगी।
इसलिए महत्वपूर्ण है यह सुनवाई
मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण का मामला पिछले कई वर्षों से कानूनी पेचीदगियों में फंसा हुआ है, जिसकी वजह से कई सरकारी भर्तियां और नियुक्तियां प्रभावित हो रही हैं। हाईकोर्ट के इस सख्त रुख से यह उम्मीद जागी है कि अप्रैल के अंतिम सप्ताह में होने वाली इस "डे-टू-डे" सुनवाई से राज्य के युवाओं और आरक्षित वर्ग को एक स्पष्ट और अंतिम निर्णय देखने को मिलेगा। तीन दिवसीय मैराथन सुनवाई इस कानूनी विवाद का भविष्य तय करेगी।
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