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पंकज चौधरी की चेतावनी से बीजेपी में सीजफायर...

पंकज चौधरी की चेतावनी से बीजेपी में सीजफायर, ब्राह्मणों में असंतोष बरकरार

उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी की राजधानी लखनऊ में पार्टी के ब्राह्मण विधायकों की बैठक को लेकर जारी चेतावनी के बाद पार्टी में अंदरखाने खामोशी है।

पंकज चौधरी की चेतावनी से बीजेपी में सीजफायर ब्राह्मणों में असंतोष बरकरार

Pankaj Chaudhary warning sparks ceasefire in BJP, Brahmin discontent persists |

लखनऊ। उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी की राजधानी लखनऊ में पार्टी के ब्राह्मण विधायकों की बैठक को लेकर जारी चेतावनी के बाद पार्टी में अंदरखाने खामोशी है। लेकिन लगता है कि पंकज चौधरी की चेतावनी ने विवाद को थामने के बजाय और हवा दे दी है। लोग कह रहे हैं कि बीजेपी के ब्राह्मण विधायकों की बैठक महज दो दिन तक चलने वाली ख़बर थी, लेकिन चेतावनी जारी कर इसे आगामी विधानसभा चुनाव तक चलने वाला नैरेटिव बना दिया गया है। पंकज चौधरी ने बुझ रही आग को हवा देदी है।

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भाजपा पर साधा निशाना

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी नेता इसे लेकर बीजेपी पर लगातार निशाना साध रहे हैं। बीजेपी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने मीडिया से बात करते हुए ब्राह्मण विधायकों की बैठक को सही बताते हुए बीजेपी अध्यक्ष की चेतावनी को गैर जरूरी बताया है। बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि "ब्राह्मण MLA की बैठक हुई तो गलत क्या है? देखिये अनुशासन का ज्ञान देने से कैसा बवंडर मचा है।"

विधायक ठाकुर रामवीर की बैठक पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देने का आरोप

समाजवाद पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष की चेतावनी को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म "X" पर लिखा– अपनों की महफ़िल सजे तो जनाब मेहरबान और दूसरों को भेज रहे चेतावनी का फ़रमान। अखिलेश का यह पोस्ट ब्राह्मण विधायकों की बैठक से पहले हुई बीजेपी विधायक ठाकुर रामवीर सिंह की उस बैठक पर था, जिसमें भाजपा और सपा के बागी ठाकुर विधायक शामिल हुए थे। इस पर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष की ओर से प्रतिक्रिया नहीं आई थी। दरअसल विगत 23 दिसंबर को बीजेपी के ब्राह्मण विधायकों की बैठक हुई थी। उससे पहले विधान मंडल सत्र के दौरान ही बीजेपी विधायक रामवीर सिंह की पहल पर ठाकुर विधायको की बैठक हुई थी। सपा का इशारा है कि रामवीर की बैठक पर उस समय तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई थी।

सपा महासचिव शिवपाल सिंह यादव ने बीजेपी के ब्राह्मण विधायकों को पार्टी में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि सपा सभी का सम्मान करेगी। बलिया से बीजेपी के ब्राह्मण सांसद सनातन पांडेय ने भी बीजेपी के ब्राह्मण विधायकों से अपने सम्मान की रक्षा के लिए सपा में आने की अपील की है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पर विधायकों का अपमान करने का आरोप

बीजेपी के ब्राह्मण विधायकों की बैठक पर दी गयी चेतावनी पर उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने कहा, "बीजेपी विधायकों ने बहुत देर कर दी। जिस प्रकार (बीजेपी) प्रदेश अध्यक्ष के द्वारा इनका अपमान किया गया। बाकी जातियों की बैठक हुई उसपर किसी कार्रवाई की बात नहीं की गई। लेकिन ब्राह्मण समाज को विशेष रूप से टारगेट करके कार्रवाई की बात हो रही है। निश्चित तौर पर इसपर इन लोगों को मजबूत रुख अपनाना चाहिए। कांग्रेस पार्टी के लोग अन्याय के खिलाफ उनका समर्थन करेंगे।"

बीजेपी में ब्राह्मण विधायकों को डांटा जा रहा है: पूर्व सपा विधायक पवन पांडेय

अयोध्या जिले के पूर्व सपा विधायक पवन पांडेय ने एक वीडियो जारी कर कहा कि ब्राह्मण विधायकों ने इकट्ठा होकर अपना दुःख-दर्द साँझा किया एक-दूसरे से अपना रोना रोया। बीजेपी विधायकों की बैठक में यह बात सामने आई कि राज्य में उनकी दरोगा नहीं सुनता, सिपाही नहीं सुनता, डीएम नहीं सुनते और क्षेत्र का विकास नहीं हो पा रहा है। विधायकों ने खुद को उपेक्षित और अपमानित महसूस करने की बात कही। ये बात ऊपर के लोगों को बहुत बुरी लगी और अब ब्राह्मण विधायक डांटे जा रहे हैं। पवन पांडेय ने कहा कि बीजेपी में ब्राह्मण विधायकों की बिलकुल यही स्थिति है कि बेचारे मारे भी जा रहे है और रोने की इजाजत भी नहीं है। पवन पांडेय ने आगे तंज कसते हुए कहा कि सोशल मीडिया, अखबार और चैनलों पर लगातार यह खबर चल रही है कि नवनियुक्त बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने विधायकों को हड़काया है।

पहले ठाकुर विधायक और अब ब्राह्मण विधायकों की बैठक ने जातीय संतुलन को लेकर बढ़ाई हलचल

ब्राह्मण संघों के कुछ पदाधिकारी बीजेपी नेतृत्व से सवाल कर रहे हैं कि जब ठाकुर विधायकों की कुटुम्ब बैठक हुई तब तो कोई प्रश्न नहीं उठा, न पार्टी नेतृत्व से कोई नसीहत दी गई! तो आखिर ब्राह्मण विधायकों के सामूहिक सहभोज पर ये सब क्यों? यूपी बीजेपी में पहले ठाकुर विधायकों की बैठक और अब ब्राह्मण विधायकों की बैठक ने पार्टी के भीतर जातीय संतुलन को लेकर हलचल बढ़ा दी है। ब्राह्मण विधायक महसूस कर रहे हैं कि सरकार और संगठन में उनकी आवाज़ कमजोर पड़ रही है।

योगी आदित्यनाथ के साढ़े आठ वर्षों के कार्यकाल में लगातार उपेक्षा का आरोप

योगी सरकार पर पहले भी ब्राह्मणों की अनदेखी के आरोप लगाते रहे हैं, जिसे विपक्ष (खासतौर पर सपा) लगातार हवा देता रहा है। ब्राह्मण समाज में इस बात को लेकर नाराजगी है कि बीजेपी को समर्थन के बावजूद इस सरकार में आबादी के अनुसार उन्हें पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है। इस वर्ग को ये दर्द है कि सीएम योगी आदित्यनाथ के पिछले साढ़े आठ वर्षों के कार्यकाल में लगातार उनकी उपेक्षा हुई है। राज्य में ब्राह्मण और ठाकुर आबादी के अनुपात पर नजर डालें तो ब्राह्मण की आबादी 10–11% है जबकि ठाकुर 6–7% हैं जो उनके मुकाबले काफी कम हैं। लेकिन इस निजाम में ठाकुरों का प्रतिनिधित्व आबादी के मुकाबले बहुत ज्यादा है। विधानसभा में 42 ब्राह्मण विधायक हैं तो ठाकुर विधायकों की संख्या 45 है। विधान परिषद में भी 14 ब्राह्मण सदस्यों के मुकाबले 23 ठाकुर विधान परिषद सदस्य हैं। यानी आबादी ज्यादा होने के बावजूद ब्राह्मणों का प्रतिनिधित्व अपेक्षाकृत कम है। और यही ब्राह्मण समुदाय की चिंता का सबब है।

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