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बाहर की दवाइयां लिखने से मरीजों की बढ़ी मुश्किलें

उमरिया: पाली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बाहर की दवाइयां लिखे जाने से मरीजों की बढ़ी मुश्किलें

उमरिया के पाली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों द्वारा बाहर की दवाइयां लिखे जाने की शिकायत सामने आई है, जिससे इलाज कराने पहुंचे गरीब मरीजों को निजी मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।

उमरिया पाली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बाहर की दवाइयां लिखे जाने से मरीजों की बढ़ी मुश्किलें

Patients Forced to Buy Medicines Outside at Pali Community Health Center in Umaria |

उमरिया (मध्य प्रदेश)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाली में व्यवस्थाओं को लेकर सवालों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब अस्पताल में इलाज कराने पहुंच रहे मरीजों को बाहर की दवाइयां लिखे जाने की शिकायत सामने आई है। आरोप है कि अस्पताल में पदस्थ चिकित्सकों द्वारा मरीजों को ऐसी दवाइयां लिखी जा रही हैं, जिन्हें निजी मेडिकल स्टोर से खरीदना पड़ रहा है।सरकारी अस्पताल में मरीज इस उम्मीद से पहुंचते हैं कि उन्हें उपचार के साथ जरूरी दवाइयां भी उपलब्ध होंगी। खासकर गरीब परिवारों के लिए सरकारी स्वास्थ्य केंद्र बड़ी राहत होता है। ऐसे में यदि डॉक्टर की पर्ची लेकर मरीज को अस्पताल के बाहर मेडिकल स्टोर जाना पड़े तो निशुल्क स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

बीएमओ बोले, पहले ही जारी कर चुके हैं पत्र

मामले को लेकर जब पाली CHC के बीएमओ पुट्टू लाल सागर से बात की गई तो उन्होंने कहा कि अस्पताल से निजी मेडिकल की दवाइयां नहीं लिखी जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि इस संबंध में चिकित्सकों को पहले ही पत्र जारी किया जा चुका है और अस्पताल आने वाले मरीजों का निशुल्क उपचार करने के निर्देश दिए गए हैं।बीएमओ ने यह भी कहा कि वे मामले को लेकर चिकित्सकों से आज ही बात करेंगे और आगे ऐसी स्थिति नहीं होने दी जाएगी।

फिर सवाल, निगरानी व्यवस्था आखिर कहां है?

बीएमओ के बयान के बाद सबसे बड़ा सवाल अस्पताल की निगरानी व्यवस्था पर खड़ा हो रहा है। जब बाहर की दवाइयां नहीं लिखने के निर्देश पहले ही दिए जा चुके थे, तो फिर ऐसी शिकायत दोबारा सामने कैसे आ गई? क्या डॉक्टरों द्वारा लिखी जा रही पर्चियों की नियमित निगरानी होती है? क्या यह देखा जाता है कि अस्पताल में उपलब्ध दवाइयों के बावजूद मरीजों को बाहर से दवा खरीदने की जरूरत क्यों पड़ रही है? अब मरीजों की नजर बीएमओ के आश्वासन पर है। देखना होगा कि कार्रवाई के बाद व्यवस्था वास्तव में बदलती है या फिर निर्देश कागजों में और मरीजों के हाथ में बाहर की दवाइयों की पर्ची का सिलसिला जारी रहता है।

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