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हिंदू धर्म में 'भू-समाधि' का...

हिंदू धर्म में ''भू-समाधि'' का दार्शनिक आधार

जबलपुर। हिंदू धर्म में जीवन को विभिन्न चरणों (संस्कारों) में विभाजित किया गया है। माना जाता है कि जब तक व्यक्ति...

हिंदू धर्म में भू-समाधि का दार्शनिक आधार

हिंदू धर्म में ''भू-समाधि'' का दार्शनिक आधार |

जबलपुर। हिंदू धर्म में जीवन को विभिन्न चरणों (संस्कारों) में विभाजित किया गया है। माना जाता है कि जब तक व्यक्ति जीवन के उत्तरार्ध या वयस्कता के उन चरणों से नहीं गुजरता, तब तक वह 'अहंकार' (Ego) और 'सांसारिक कर्मों' के जाल में पूरी तरह नहीं बंधता। चूंकि बच्चे इन सांसारिक बंधनों से मुक्त होते हैं, इसलिए उन्हें उन संस्कारों की आवश्यकता नहीं होती, जो वयस्कता के जटिल कर्मों को काटने के लिए आवश्यक हैं।

क्या है अग्नि का अर्थ (ज्ञान-अग्नि)?

दाह संस्कार में अग्नि को 'ज्ञान का प्रतीक' माना जाता है, जो शरीर के साथ-साथ सूक्ष्म शरीर से लिपटे मोह, वासनाओं और जटिल कर्मों को भस्म करती है। चूंकि बच्चों के पास ऐसी कोई 'संचित वासना' या जटिल कर्म-संस्कार नहीं होते, इसलिए उन्हें इस अग्नि-शुद्धिकरण की आवश्यकता नहीं होती।

प्रकृति की गोद में विसर्जन

जिस प्रकार एक बीज को अंकुरित होने के लिए मिट्टी में बोया जाता है, उसी प्रकार बच्चे को 'भू-समाधि' देना यह दर्शाता है कि आत्मा ने अपना भौतिक अनुभव तो शुरू किया, लेकिन संसार का दुःख या मोह नहीं भोगा। मिट्टी में समाना उन्हें वापस प्रकृति के पंचतत्वों में सबसे सौम्य तरीके से विलीन करने का माध्यम है।

​साधु-संतों और बच्चों की स्थिति में समानता

​आपने सन्यासियों का जो उल्लेख किया, वह इस परंपरा के तर्क को और पुष्ट करता है। हालांकि एक बच्चा और एक सन्यासी आयु के दो विपरीत छोरों पर होते हैं, लेकिन आध्यात्मिक दृष्टि से वे एक ही बिंदु पर मिलते हैं- 'अहंकार का अभाव'।

​संन्यासी अहंकार को नष्ट कर देता है

एक सन्यासी अपनी तपस्या और वैराग्य के माध्यम से अहंकार को नष्ट कर देता है, जबकि एक बच्चा अपनी जन्मजात निर्दोषता (Innocence) के कारण अहंकार से मुक्त होता है। दोनों ही स्थितियाँ ऐसी हैं जहाँ आत्मा सांसारिक बंधनों के भार से मुक्त मानी जाती है, इसलिए दोनों को ही 'समाधि' का अधिकारी माना जाता है। यह परंपरा मुख्य रूप से इस विश्वास पर टिकी है कि जीवन की यात्रा जितनी शुद्ध और निष्कपट होगी, उसे विदाई देने की प्रक्रिया उतनी ही शांत और सरल होनी चाहिए।

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