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इंडिया ब्लॉक का चुनाव आयोग पर बढ़ा दबाव

इंडिया ब्लॉक का चुनाव आयोग पर बढ़ा दबाव, CEC के इस्तीफे और SIR वापसी की मांग

नई दिल्ली में हुई इंडिया ब्लॉक की समन्वय बैठक के बाद विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, विशेष गहन संशोधन (SIR) वापस लेने और मतपत्र से चुनाव कराने की मांग दोहराई।

इंडिया ब्लॉक का चुनाव आयोग पर बढ़ा दबाव cec के इस्तीफे और sir वापसी की मांग

इंडिया ब्लॉक का चुनाव आयोग पर बढ़ा दबाव |

नई दिल्ली: चुनाव आयोग के खिलाफ एकजुट मोर्चा पेश करते हुए, इंडिया ब्लॉक की पार्टियों ने बुधवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे, विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) को वापस लेने और भविष्य के चुनावों के लिए मतपत्र प्रणाली को फिर से लागू करने की मांग की, जिससे चुनाव आयोग के साथ उनका राजनीतिक टकराव और भी बढ़ गया। नई दिल्ली के संविधान क्लब में इंडिया ब्लॉक की समन्वय बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खर्गे ने देशव्यापी विरोध कार्यक्रम की घोषणा करते हुए कहा कि इंडिया ब्लॉक के नेता 2 से 8 अक्टूबर तक जिला स्तर पर लोकतंत्र बचाओ मार्च निकालेंगे। 

विपक्ष 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग तक करेगा मार्च

उन्होंने आगे कहा कि विपक्षी सांसद 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग तक मार्च करेंगे, जबकि विपक्षी नेता अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलकर कथित संस्थागत मुद्दों पर चिंता व्यक्त करेंगे। इससे भाजपा की ओर से कड़ी आलोचना हुई। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष के आरोपों पर हमला करते हुए कहा, अगर वे जीतते हैं, तो लोकतंत्र जिंदाबाद, अगर वे हारते हैं, तो चुनाव आयोग मुर्दाबाद। उन्होंने इस आलोचना को हार के बाद की हताशा का नतीजा बताया। बैठक में कांग्रेस, सपा, एआईटीसी, एनसीपी (एसपी), एसएस (यूबीटी), आरजेडी, सीपीएम, सीपीआई, जेकेएनसी, जेकेपीडीपी, जेएमएम, सीपीआई-एमएल, आईयूएमएल, केसी (एम), एमडीएमके, वीसीके, आरएसपी, केसी (जे) और एआईएफबी ने भाग लिया। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव बैठक में शामिल नहीं हुए, लेकिन उन्होंने दो सपा सांसदों को भेजा। 

खरगे ने लोकतंत्र पर जताई चिंता

कांग्रेस के महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने दल की अप्रतिबंधित मांगों को सूचीबद्ध करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त पर चुनाव में धांधली का आरोप लगाया। हमारी अटल मांगें हैं, ज्ञानेश कुमार को तत्काल हटाया जाए, भविष्य के सभी चुनावों में एसआईआर से पहले की मतदाता सूचियों का उपयोग किया जाए, ईवीएम के बजाय मतपत्रों का उपयोग किया जाए और मतदाता सूची से बाहर किए गए सभी लोगों के लिए एक प्रभावी अपील तंत्र स्थापित किया जाए। साथ ही तकनीकी/प्रशासनिक कारणों से वास्तविक मतदाताओं को बाहर किए जाने से बचाया जाए। बैठक को संबोधित करते हुए खरगे ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था "एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य" के सिद्धांत पर बनी है। साथ ही आरोप लगाया कि यह खतरे में है। 

खरगे ने मतदाता सूची में बदलाव पर उठाए सवाल

उन्होंने कहा, पूरे देश में नागरिक और राजनीतिक दल चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर गंभीर चिंताएं जता रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ईवीएम, मतदाता सूची में हेरफेर और मतदाता सूचियों में बदलाव से जुड़े सवालों के संतोषजनक जवाब नहीं मिले हैं। एसआईआर के मुद्दे पर खरगे ने कहा, यह चौंकाने वाला है कि 13.3 करोड़ मतदाताओं को मतदाता सूची से खुलेआम हटा दिया गया है। लोकतंत्र में भाग लेने का उनका अधिकार छीन लिया गया है। उन्होंने आगे कहा, संविधान के अनुच्छेद 324 में परिकल्पित स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव आयोग के बिना कोई विश्वसनीय चुनाव नहीं हो सकता। 

खरगे ने CEC पर लगाए गंभीर आरोप

मुख्य चुनाव आयुक्त को निशाना बनाते हुए खर्गे ने कहा, आज हमारे मुख्य चुनाव आयुक्त पूरी तरह बेनकाब हो गए हैं। उनके दो साथी सदस्यों ने 10 महीनों में 14 बार पत्र लिखा है। इससे उनकी ईमानदारी और इरादों पर ही सवाल उठते हैं, इसलिए उन्हें उनके पद से हटा देना चाहिए। अगर उनमें जरा भी संवैधानिक या नैतिक शर्म बची है, तो वे खुद इस्तीफा दे देंगे और उन ताकतों के खिलाफ गवाह बन जाएंगे जो हमारी मतदाता सूची में दखल दे रही हैं। राहुल गांधी ने कहा कि भारत के नेता व्यक्तिगत रूप से यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि भारतीय लोकतंत्र को नष्ट करने वालों को सजा मिले।

ममता ने CEC के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रखने की बात कही

उन्होंने कहा, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे कितने वरिष्ठ हैं, कौन हैं, भारतीय लोकतंत्र इस देश के हर एक व्यक्ति से बड़ा है। हमें विश्वास है कि अगले कुछ महीनों में हम देश में गंभीर बदलाव लाएंगे। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के इस्तीफे की भी मांग की। उन्होंने कहा, हम लोकतंत्र को बचाएंगे। हमें आप सभी का समर्थन चाहिए, छात्रों, युवाओं और पत्रकारों। इस बैठक में कई राज्यों में प्रतिद्वंद्वी दल शामिल हुए, जिनमें पश्चिम बंगाल में सीपीआई (एम) और तृणमूल कांग्रेस और केरल में कांग्रेस और वामपंथी दल शामिल हैं। राज्य स्तर पर मतभेदों को दरकिनार करते हुए, ये दल विवाद के लगातार बढ़ने के बीच एक साथ आए। 

CEC के मुद्दे पर इंडिया ब्लॉक से बाहर की पार्टियों ने भी उठाई आवाज

महत्वपूर्ण बात यह है कि मुख्य चुनाव आयुक्त का विरोध इंडिया ब्लॉक के ढांचे से परे भी फैल गया। बीजू जनता दल (बीजेडी) के सांसद सस्मित पात्रा ने कहा कि हालांकि उनकी पार्टी गठबंधन का हिस्सा नहीं है, फिर भी वह ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग करती है। इसी तरह आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़ा मुद्दा एक राष्ट्रीय मुद्दा है और उन्होंने राजनीतिक दलों से 2 अक्टूबर को होने वाले विरोध प्रदर्शन का समर्थन करने का आह्वान किया। तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के बाद कांग्रेस से मतभेदों के बावजूद, डीएमके के प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने कहा कि उनकी पार्टी और कांग्रेस ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर एक ही बात कह रहे हैं। कांग्रेस और डीएमके एक ही बात कह रहे हैं कि ज्ञानेश कुमार को हटाया जाना चाहिए, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम इंडिया ब्लॉक का हिस्सा हैं। 

भाजपा ने आरोपों को बताया निराशा की राजनीति

आम आदमी पार्टी जैसी पार्टियां भी आज की बैठक में शामिल नहीं हो रही हैं, लेकिन हम ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर एकमत हैं। अगर यह मुद्दा संसद में उठता है, तो हम इसका समर्थन करेंगे। संयोगवश कई भाजपा नेताओं ने चुनावी हार के बाद विपक्ष के आरोपों को निराशा और बकवास बताकर खारिज कर दिया। शिवराज सिंह चौहान ने सबसे आगे बढ़कर कांग्रेस के ईवीएम संबंधी आरोपों पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, कर्नाटक में कांग्रेस कैसे जीती? तेलंगाना में कांग्रेस कैसे जीती? हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस कैसे जीती? बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरोगी ने भी इसी तरह की भावना व्यक्त करते हुए कहा, धीरे-धीरे इनमें भी दरारें दिखाई देने लगी हैं। डीएमके ने कहा है कि हम नहीं जाएंगे, अखिलेश यादव नहीं जा रहे। जब भी चुनाव आते हैं या विपक्ष बुरी तरह हारता है, ऐसी बैठकें होती हैं और बैठक के बाद सिर्फ बयानबाजी होती है।

स्थिरता को लेकर जताया संदेह

राजस्थान के उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने गठबंधन की स्थिरता पर सवाल उठाते हुए कहा, जब भी उन्होंने गठबंधन बनाए हैं, वे गठबंधन विफल रहे हैं, इस विफलता का कारण उनके कार्य करने के तरीके पर अविश्वास है। मुझे नहीं लगता कि उनका गठबंधन टिकेगा, या वास्तव में कभी टिका भी है। कांग्रेस नेतृत्व को सीधे निशाना बनाते हुए बिहार के मंत्री रामकृपाल यादव ने तर्क दिया कि गहरे मतभेद विपक्ष के भीतर किसी भी सार्थक एकता को रोकेंगे। उन्होंने कहा, इनमें मतभेद हैं ये लोग कभी एकजुट नहीं हो सकते। अभी कांग्रेस पार्टी 99 पर है, लेकिन उनके (राहुल गांधी के) नेतृत्व में यह 9 पर आ जाएगी। पश्चिम बंगाल के मंत्री शंकर घोष ने इस बैठक को कम महत्व देते हुए गठबंधन को राजनीतिक पतन के डर की प्रतिक्रिया बताया। 

आगामी चुनावों से पहले सियासी टकराव के संकेत

उन्होंने कहा, मुझे नहीं लगता कि इंडिया गठबंधन का कोई वास्तविक अस्तित्व है। वे कभी-कभार अपने निजी हितों की पूर्ति के लिए मिलते हैं। फिलहाल, वे राजनीतिक मैदान में अपने अस्तित्व को लेकर चिंतित हैं, इसलिए खुद को बचाने के लिए ऐसी बैठकें कर रहे हैं, लेकिन इससे कुछ हासिल नहीं होगा। वे जनता को गुमराह करने के लिए दुष्प्रचार करने के लिए एक साथ आ रहे हैं, बस यही बात है। भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, वे अपनी मनमानी करते रहेंगे और अंतहीन बैठकें करते रहेंगे- कुछ लोग कहेंगे कि वे शामिल होंगे, जबकि अन्य कहेंगे कि वे भाग नहीं लेंगे। विपक्ष के इस मुद्दे पर अडिग रुख को देखते हुए, एक कड़वी राजनीतिक लड़ाई का माहौल बन गया है। खासकर 2027 में पांच राज्यों में चुनाव होने वाले हैं। 

(इनपुट: ANI)

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