प्राइम न्यूज़ – एक कसम, राष्ट्र प्रथम
Breaking News

मानसून आते ही जंगलों से निकला 'पुटू'

मानसून आते ही जंगलों से निकला 'पुटू', उमरिया के ग्रामीणों की बढ़ी कमाई

मानसून की दस्तक के साथ ही उमरिया के लोगों को पुटू का बेसब्री से इंतजार होने लगता है, क्योंकि बाजार में इसकी अच्छी-खासी कीमत मिल जाती है। बता दें, पुटू यहां की खास पहचान बन चुका है।

मानसून आते ही जंगलों से निकला पुटू उमरिया के ग्रामीणों की बढ़ी कमाई

Putu Wild Mushroom Umaria Forest Demand Monsoon |

उमरिया: मानसून की दस्तक के साथ ही जिले के जंगलों में मिलने वाला पारंपरिक जंगली फल पुटू एक बार फिर बाजारों में दिखाई देने लगा है। अपनी खास पहचान और सीमित उपलब्धता के कारण यह फल ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहर के लोगों के बीच भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। साल में केवल दो महीने मिलने वाला पुटू अब ग्रामीणों के लिए कमाई का एक जरिया भी बन गया है।

जंगल पर निर्भर परिवारों को अतिरिक्त आमदनी भी उपलब्ध कराता है आमदनी

सुबह होते ही जिले के कई ग्रामीण जंगलों की ओर रुख कर रहे हैं। वे साल और सरई के पेड़ों के नीचे प्राकृतिक रूप से उगने वाले पुटू को एकत्र करते हैं और फिर बाजारों में बेचने पहुंचते हैं। बारिश के मौसम में मिलने वाला यह फल न केवल लोगों के खान-पान का हिस्सा बनता है, बल्कि जंगल पर निर्भर परिवारों को अतिरिक्त आमदनी भी उपलब्ध कराता है।

सीमित समय के लिए ही उपलब्ध रहता है पुटू फल

किसान अभिषेक अग्रवाल के अनुसार, पुटू की खेती नहीं की जाती, बल्कि यह जंगल में अपने आप उगता है। गर्मी के बाद जब बारिश की बूंदें जमीन को भिगोती हैं तो अनुकूल वातावरण मिलने पर साल और सरई के पेड़ों के नीचे पुटू निकलना शुरू हो जाता है। यही वजह है कि यह प्राकृतिक फल सीमित समय के लिए ही उपलब्ध रहता है।

ग्रामीण हर साल बेसब्री से करते हैं पुटू का इंतजार

ग्रामीण बताते हैं कि पुटू को जंगल से लाकर बाजार में बेचने से उन्हें मौसम के दौरान अच्छी आमदनी मिल जाती है। स्थानीय लोग इसकी सब्जी बनाकर खाते हैं। ग्रामीण इसके स्वाद के कारण हर साल इसके आने का इंतजार करते हैं। सीमित अवधि तक मिलने के कारण बाजार में इसकी मांग बनी रहती है।

उमरिया के जंगलों की खास पहचान बन चुका है पुटू

चिकित्सकों के अनुसार, पुटू एक मौसमी खाद्य पदार्थ है, जिसमें शरीर के लिए उपयोगी पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसमें मौजूद फाइबर पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में सहायक माना जाता है। इसके अलावा इसमें विटामिन और अन्य पोषक तत्व भी पाए जाते हैं। प्रकृति की गोद से निकलकर लोगों की थाली तक पहुंचने वाला पुटू उमरिया के जंगलों की एक खास पहचान बन चुका है। यह जहां लोगों को स्वाद देता है, वहीं ग्रामीणों के लिए रोजगार का छोटा लेकिन महत्वपूर्ण साधन भी साबित हो रहा है। 

ये भी पढे़ं- मैहर में ओवररेट शराब का विरोध करना पड़ा भारी, ठेकेदार के गुर्गों पर युवक से मारपीट का आरोप
 

Related to this topic: