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अदालत में 1,98,228 मामलों का निस्तारण

रायबरेली राष्ट्रीय लोक अदालत में 1,98,228 मामलों का निस्तारण, 21.66 करोड़ से अधिक के समझौते

रायबरेली राष्ट्रीय लोक अदालत में 1,98,228 मामलों का सुलह-समझौते से निस्तारण हुआ। विभिन्न मामलों में 21 करोड़ 66 लाख 19 हजार 650 रुपये से अधिक के समझौते तय हुए।

रायबरेली राष्ट्रीय लोक अदालत में 198228 मामलों का निस्तारण 2166 करोड़ से अधिक के समझौते

Raebareli Lok Adalat Settles 198,228 Cases, Agreements Over Rs 21.66 Crore |

रायबरेली (उत्तर प्रदेश)। रायबरेली में शनिवार को जनपद न्यायालय के प्रांगण में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण और उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के दिशा-निर्देशों पर आयोजित लोक अदालत की अध्यक्षता जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं जनपद न्यायाधीश अमित पाल सिंह ने की। लोक अदालत में 1,98,228 मामलों का आपसी सहमति और सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारण किया गया।

21 करोड़ 66 लाख रुपये से अधिक के समझौते

लोक अदालत में विभिन्न मामलों में कुल 21 करोड़ 66 लाख 19 हजार 650 रुपये से अधिक की धनराशि के समझौते तय हुए। इसका मुख्य उद्देश्य वर्षों से लंबित मुकदमों का बिना किसी वैमनस्य के शीघ्र निस्तारण कर आम जनता को सुलभ और सस्ता न्याय उपलब्ध कराना था। मामलों के निस्तारण के लिए सुलह और आपसी सहमति का आधार अपनाया गया।

ई-चालान और वैवाहिक विवादों का भी निस्तारण

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव अनिशा ने बताया कि लोक अदालत में ई-चालान, चेक बाउंस (एनआई एक्ट) और वैवाहिक विवादों के मामलों का निस्तारण कराया गया। इसके साथ ही बैंकों और वित्तीय कंपनियों के प्री-लिटिगेशन मामलों का भी मौके पर ही निपटारा किया गया। न्यायालय परिसर में सामाजिक कल्याण का संदेश देते विभिन्न स्टॉल भी लगाए गए।

बंदियों की सामग्री और स्वास्थ्य विभाग के स्टॉल

लोक अदालत परिसर में कारागार में बंदियों द्वारा निर्मित सामग्री की प्रदर्शनी लगाई गई। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग और ‘एक जिला, एक उत्पाद’ के स्टॉल भी प्रमुख रहे। इन स्टॉल के जरिए न्याय के साथ-साथ सामाजिक कल्याण का संदेश दिया गया। आयोजन में न्यायिक प्रक्रिया के साथ सामाजिक सरोकारों को भी स्थान दिया गया।

काउंसलिंग से तलाक की अर्जी वापस, बची गृहस्थी

लोक अदालत के दौरान प्रवीन कुमार बनाम शान्ती गुप्ता मामले में काउंसलिंग के बाद दंपति ने तलाक की अर्जी वापस लेने का फैसला किया। दोनों का विवाह 16 दिसंबर 2023 को हुआ था, लेकिन शादी के कुछ समय बाद उनके नवजात बच्चे की गंभीर बीमारी से असामयिक मौत हो गई। इसके बाद दोनों मानसिक तनाव में चले गए और आपसी मतभेद बढ़ने के बाद मामला धारा 13-बी के तहत तलाक तक पहुंच गया।

समझाइश के बाद साथ रहने का फैसला

परिवार न्यायालय ने मामले को केवल कानूनी कागजी कार्रवाई न मानते हुए दोनों पक्षों की गहन काउंसलिंग कराई। न्यायाधीश और काउंसलर्स की समझाइश तथा आत्मीय प्रयासों का असर हुआ। इसके बाद दोनों ने अतीत के दुख को भुलाकर तलाक की अर्जी वापस ले ली और एक साथ नया जीवन शुरू करने का फैसला किया।

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