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हाथ से बुनी साड़ी का पहनना माना जाता है शुभ

राहुल गांधी संसद में उठायेंगे बनारसी साड़ी के बुनकरों की समस्या

देश और दुनिया में मशहूर काशी की बनारसी साड़ी और इस काम में लगे बुनकरों की समस्या नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी उठायेंगे। राहुल गांधी ने इस बात का एलान अपने व्हाट्सऐप चैनल पर एक पोस्ट में किया।

राहुल गांधी संसद में उठायेंगे बनारसी साड़ी के बुनकरों की समस्या

राहुल गांधी संसद में उठायेंगे बनारसी साड़ी के बुनकरों की समस्या

हाथ से बुनी साड़ी का पहनना माना जाता है शुभ

नई दिल्ली। 
देश और दुनिया में मशहूर काशी की बनारसी साड़ी और इस काम में लगे बुनकरों की समस्या नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी उठायेंगे। राहुल गांधी ने इस बात का एलान अपने व्हाट्सऐप चैनल पर एक पोस्ट में किया। 

पीएम नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के बनारसी साड़ी के बुनकरों के एक समूह ने पिछले दिनों राहुल गांधी से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद बनारसी साड़ी के कारीगरों के "दर्द" का राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि वह इस विषय को सड़क से लेकर संसद तक उठाएंगे।

मालूम हो कि बनारसी साड़ी के दुनिया भर में अलग पहचान है। शादी ब्याह में हाथ से बुनी इस साड़ी का पहनना न सिर्फ शुभ माना जाता है बल्कि विलासिता और वैभव का प्रतीक भी है। पर नोटबंदी और जीएसटी ने इस उद्योग की कमर तोड़ दी है। इस कलात्मक वस्त्र के बुनकर और कारोबारी इन दिनों कई तरह के समस्याओं से जूझ रहे हैं। इनमें चीन से आने वाली नकली जरी और सूरत जैसे शहरों में कम दाम पर बनने वाली मशीनी (डुप्लिकेट) साड़ियों की बाजार में आमद प्रमुख कारण हैं। इस वजह से हाथ से बनी साड़ियों की मांग और कीमत घट गई है। पीएम के संसदीय क्षेत्र का वोटर होने के बावजूद मजबूरन ये बुनकर पारंपरिक कलाकारी का काम छोड़कर दिहाड़ी मजदूरी और आटो चलाने जैसे काम करने को विवश हैं।

बुनकरों के धागों में हिंदुस्तान की आत्मा

राहुल गांधी ने बुनकरों से मुलाकात के बाद अपने व्हाट्सऐप चैनल पर पोस्ट किया, "कल मैंने संसद में बनारसी साड़ियों की खूबसूरती, उसकी संस्कृति और इतिहास के बारे में बात की, उनके धागों में ही हिन्दुस्तान की आत्मा गुथी हुई है। बनारसी सिल्क साड़ियां और बनारसी कढ़ाई का नाम लेते ही भारत की समृद्ध कला आंखों में उतर आती है। सदियों से चली आ रही यह परंपरा केवल कपड़ा नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता, हमारे त्योहारों और हमारे उत्सवों की पहचान है।"

प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात कर बताई थीं समस्याएं

उन्होंने कहा कि कुछ दिनों पहले जन संसद में बनारस के कढ़ाई कारीगर भाइयों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात हुई, उनका दर्द वही है जो भारत के करोड़ों छोटे कारीगरों, दस्तकारों और हुनरमंदों की आज की दास्तान है।" उन्होंने कहा, "उनकी शिकायत उस वक्त है और जब उनके सांसद खुद प्रधानमंत्री मोदी हैं।"

बोले, रिक्शा चलाने को मजबूर हैं बुनकर

कांग्रेस नेता ने कहा, "सरकारी उपेक्षा के शिकार ये कारीगर अपना परंपरागत काम छोड़ कर मजदूरी करने, रिक्शा चलाने के लिए मजबूर हैं। उन्होंने यह भी बताया कि बेरोज़गारी बनारस की सबसे कड़वी सच्चाई बन चुकी है। खासकर युवाओं के लिए रोजगार के सारे अवसर खत्म हो गए हैं। मजबूरी में वो अपने शहर, अपना घर छोड़कर दूसरे राज्यों और शहरों में काम की तलाश में भटक रहे हैं।"

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