राजकोट में मुफ्त इको-फ्रेंडली गणपति मूर्ति वर्कशॉप में करीब 215 लोगों ने हिस्सा लिया। लोगों को मिट्टी की मूर्तियां और प्राकृतिक सजावट अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
राजकोट (गुजरात)। गणेशोत्सव के दौरान प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) की मूर्तियों के बजाय मिट्टी की मूर्तियों को बढ़ावा देने के लिए राजकोट में मुफ्त वर्कशॉप आयोजित की गई। चित्रनगरी में ‘मिशन स्मार्ट सिटी ट्रस्ट’ की ओर से आयोजित इस वर्कशॉप में 210 से ज्यादा बच्चों, युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों ने हिस्सा लिया। इस पहल का आयोजन लगातार छठे साल किया गया, जिसकी शुरुआत 2021 में हुई थी।

प्राकृतिक मिट्टी से मूर्ति बनाने की ट्रेनिंग
वर्कशॉप में प्रतिभागियों को प्राकृतिक मिट्टी से गणपति की मूर्तियां बनाने और उन्हें इको-फ्रेंडली चीजों से सजाने की ट्रेनिंग दी गई। इस साल करीब 215 लोगों ने हिस्सा लिया। इनमें 10-12 साल के बच्चों से लेकर 70 साल की उम्र तक के लोग शामिल रहे। प्रतिभागियों ने अलग-अलग आकार की गणपति मूर्तियां बनाईं।

POP के विकल्प को बढ़ावा देने की पहल
आयोजक मौलिक गोटेचा के अनुसार, पहल का मकसद लोगों को POP की मूर्तियों से दूर रहने और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है। उन्होंने बताया कि पिछले 10 साल से राजकोट में वॉल पेंटिंग प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है। पिछले छह साल से गणेशोत्सव के दौरान POP के बजाय इको-फ्रेंडली मिट्टी के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए यह वर्कशॉप आयोजित की जा रही है।

प्राकृतिक चीजों से सजावट पर जोर
प्रतिभागियों को गणपति की मूर्तियों की सजावट के लिए प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल करने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया। कुछ लोग अपने घर से सजावटी सामान और कलश लेकर आए थे। गोटेचा ने बताया कि कुछ प्रतिभागियों ने करीब आधे फीट ऊंची, जबकि कुछ ने एक से डेढ़ फीट तक की गणपति मूर्तियां बनाईं।

POP और केमिकल रंगों के असर पर जागरूकता
वर्कशॉप में गणेशोत्सव के दौरान POP और केमिकल वाले रंगों से पर्यावरण पर पड़ने वाले असर को लेकर जागरूकता फैलाने पर जोर दिया गया। आयोजकों ने लोगों से मिट्टी, प्राकृतिक रंगों और अन्य इको-फ्रेंडली चीजों को चुनने तथा प्लास्टिक और प्रदूषण फैलाने वाली चीजों से बचने की अपील की। अभियान में “मेरा गणपति, मेरी जिम्मेदारी” और “पर्यावरण बचाएं, मिट्टी का गणपति घर लाएं” जैसे संदेश दिए गए।

बच्चों के साथ पहुंचीं जूही हर्षिता भट्ट
वर्कशॉप में शामिल जूही हर्षिता भट्ट ने बताया कि वह अपने दो बच्चों को लेकर कार्यक्रम में पहुंची थीं। उन्होंने कहा कि यह उनका दूसरा साल है और यह एक अच्छी पहल है। उन्होंने बच्चों को कम उम्र में ही मूर्ति बनाना सीखने का अवसर मिलने को भी अच्छी बात बताया।

बेहतरीन मूर्तियों को दिए गए पुरस्कार
वर्कशॉप के दौरान लोगों ने अलग-अलग तरह की गणपति मूर्तियां बनाईं। महिला प्रतिभागियों ने पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार तरीके से त्योहार मनाने के अभियान में भी हिस्सा लिया। आयोजकों के मुताबिक, सबसे अच्छी मूर्तियां बनाने वाले प्रतिभागियों को इनाम भी दिए गए।
मिट के अनुसार, इससे पारंपरिक आस्था और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी को साथ लाने में मदद मिलेगी। मिट्टी की मूर्तियां सही तरीके से विसर्जन्टी की मूर्तियां चुनने की अपील
इस पहल का उद्देश्य परिवारों और गणेश मंडलों को मिट्टी की मूर्तियां चुनने के लिए प्रोत्साहित करना है। आयोजकों के अनुसार, इससे पारंपरिक आस्था और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी को साथ लाने में मदद मिलेगी। मिट्टी की मूर्तियां सही तरीके से विसर्जन के बाद प्राकृतिक रूप से घुल जाती हैं, जिससे जलाशयों पर पड़ने वाले हानिकारक असर को कम किया जा सकता है।

पर्यावरण संरक्षण के साथ गणेशोत्सव मनाने का संदेश
कार्यक्रम का समापन नागरिकों से पर्यावरण की रक्षा करते हुए गणेशोत्सव मनाने की अपील के साथ हुआ। गणेश चतुर्थी 10 दिन तक चलने वाला हिंदू त्योहार है, जिसमें भगवान गणेश की मूर्तियां घरों और सार्वजनिक स्थानों पर स्थापित की जाती हैं। पूजा-अर्चना और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बाद अंत में मूर्तियों का विसर्जन किया जाता है। (Source: ANI)
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