बाघ अभ्यारण्यों की चुनौतियों और कमियों पर रिपोर्ट राष्ट्रीय वन्यजीव अभ्यारण्य (एनटीसीए) के समक्ष रखी जाएगी।
अलवर,(राजस्थान)। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा है, कि देश के बाघ अभ्यारण्यों में मौजूद कमियों और चुनौतियों से जुड़े निष्कर्ष व सुझाव राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे, ताकि भविष्य की संरक्षण नीतियों को और अधिक वैज्ञानिक एवं प्रभावी बनाया जा सके।
समग्र दस्तावेज तैयार कर NTCA को सौंपा जाएगा
अलवर स्थित सरिस्का टाइगर रिजर्व में “बाघों का पुनःप्रवेश: अवसर और चुनौतियां” विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया, कि देश के सभी 58 टाइगर रिजर्व अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं और चुनौतियों का वैज्ञानिक व तकनीकी मूल्यांकन प्रस्तुत करेंगे। इन सभी रिपोर्टों के आधार पर एक समग्र दस्तावेज तैयार कर NTCA को सौंपा जाएगा।
वन भूमि उपयोग में बदलाव से जुड़े निर्णय सख्त
मंत्री ने कहा कि कुनो और मुकुंदरा जैसे क्षेत्रों में हुए पिछले बाघ पुनर्स्थापन प्रयासों में सामुदायिक भागीदारी की कमी एक बड़ी चुनौती रही है, जिसे अब प्राथमिकता के आधार पर सुधारा जा रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया, कि वन भूमि उपयोग में बदलाव से जुड़े निर्णय सख्त वैज्ञानिक मानकों के आधार पर लिए जाते हैं, जिसमें जनसंख्या घनत्व, पारिस्थितिकी और अन्य तकनीकी पहलुओं का विस्तृत अध्ययन शामिल होता है।
संरक्षित क्षेत्रों का होगा स्पष्ट सीमांकन
मानव और वन्यजीव संघर्ष पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार 2014 से संरक्षित क्षेत्रों की स्पष्ट सीमांकन और बेहतर प्रबंधन पर विशेष ध्यान दे रही है, ताकि बाघ संरक्षण को अधिक प्रभावी बनाया जा सके। भूपेंद्र यादव ने विश्वास जताया, कि यह कार्यशाला बाघ संरक्षण की दिशा में भविष्य की नीतियों को नई दिशा देगी और राज्यों, NTCA, भारतीय वन्यजीव संस्थान तथा अन्य संस्थाओं के बीच सहयोग को और मजबूत करेगी। (एएनआई)
यह भी पढ़ेंः रायबरेली में पल्स पोलियो अभियान का आगाज, डीएम ने बच्चों को पिलाई दवा