विंध्य की पावन और वीरों की भूमि रीवा के लिए यह दिन केवल खुशी का नहीं, बल्कि इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षरों से दर्ज होने वाला क्षण था।
रीवा {मध्य प्रदेश}: विंध्य की पावन और वीरों की भूमि रीवा के लिए यह दिन केवल खुशी का नहीं, बल्कि इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षरों से दर्ज होने वाला क्षण था। रीवा के बेटे रिशु पांडे ने अपनी कड़ी मेहनत, अटूट संकल्प और परिवार के त्याग के बल पर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर पूरे विंध्य क्षेत्र का मस्तक गर्व से ऊंचा कर दिया है।
कड़ा परिश्रम और गया में कठोर ट्रेनिंग
सफलता की यह राह आसान नहीं थी। रिशु पांडे ने ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी, गया में एक साल की कठिन और अनुशासन से भरी ट्रेनिंग पूरी की। 5 सितंबर को जब वे भारतीय सेना में आधिकारिक रूप से लेफ्टिनेंट के पद पर चयनित हुए, तो रीवा की फिज़ाओं में खुशी की लहर दौड़ गई।
रीवा आगमन पर ऐतिहासिक स्वागत रैली
अफसर बनने के बाद जब रिशु पहली बार अपने गृह नगर रीवा पहुंचे, तो रीवा वासियों ने उनका ऐसा स्वागत किया जिसे युगों तक याद रखा जाएगा। रीवा में एक भव्य स्वागत रैली निकाली गई, जिसमें हजारों की संख्या में युवा, मित्र और बुजुर्ग हाथों में तिरंगा और चेहरे पर मुस्कान लिए शामिल हुए। पूरे रास्ते लोगों ने लेफ्टिनेंट रिशु पांडे पर पुष्पवर्षा की और ढोल-नगाड़ों की थाप पर जश्न मनाया। इस स्वर्णिम अवसर पर प्रसिद्ध चिरहुला नाथ बजरंगबली मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की गई और विशाल भंडारे का आयोजन कर रीवावासियों को प्रसाद वितरित किया गया।
यह मेरे माता-पिता के त्याग का फल है
मीडिया से बातचीत करते हुए रिशु ने सादगी और नम्रता की मिसाल पेश की। उन्होंने कहा यह मुकाम मेरी अकेली मेहनत का नहीं, बल्कि मेरे माता-पिता के सालों के त्याग और कड़े परिश्रम का फल है। कंधे पर लगे दो सितारों से ज्यादा मेरे लिए वह जिम्मेदारी मायने रखती है, जो मुझे अपनी यूनिट और देश के जवानों के प्रति निभानी है।
पूरे विंध्य में गर्व का माहौल
लेफ्टिनेंट रिशु पांडे की यह सफलता केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि विंध्य के उन तमाम युवाओं के लिए प्रेरणा की किरण है जो देश सेवा का सपना देखते हैं। रीवा का यह लाल अब देश की सीमाओं की रक्षा करने और भारतीय सेना के गौरव को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
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