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अब श्योपुर में सक्रिय रेत माफिया, चंबल नदी से अवैध परिवहन बढ़ा

श्योपुर। ​मुरैना जिले में अवैध रेत खनन के खिलाफ प्रशासन की सख्ती और सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणियों के...

अब श्योपुर में सक्रिय रेत माफिया चंबल नदी से अवैध परिवहन बढ़ा

अब श्योपुर में सक्रिय रेत माफिया, चंबल नदी से अवैध परिवहन बढ़ा |

श्योपुर। ​मुरैना जिले में अवैध रेत खनन के खिलाफ प्रशासन की सख्ती और सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणियों के बाद, अब रेत माफिया ने श्योपुर की ओर कदम बढ़ा दिया है। चंबल नदी से अवैध रेत का परिवहन अब श्योपुर के विभिन्न इलाकों में बड़े पैमाने पर बढ़ गया है। यह अब स्थानीय प्रशासन के लिए एक नई चुनौती बन गया है।

​150 से अधिक ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से निकाला जा रहा रेत

​जानकारी के अनुसार, श्योपुर में रोज 150 से अधिक ट्रैक्टर-ट्रॉली अवैध रूप से रेत ढोने के काम में लगे हुए हैं। मुरैना में प्रशासनिक कार्रवाई और पुलिस की सक्रियता बढ़ा कर रेत माफिया ने श्योपुर के सुरक्षित ठिकानों को अपना नया केंद्र बना लिया है। ये ट्रैक्टर-ट्रॉलियां चंबल नदी के घाटों से अवैध रेत निकालकर इसे विभिन्न निर्माण स्थलों तक पहुँचा रहे हैं।

​सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरणीय संकट बताया

​यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में चंबल अभयारण्य (National Chambal Sanctuary) में हो रहे अवैध खनन को लेकर मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सरकारों को कड़ी फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने चंबल नदी में हो रहे अवैध खनन को 'पर्यावरणीय संकट' करार दिया है।

शीर्ष कोर्ट ने दिये कड़े निर्देश

शीर्ष अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि खनन क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और अवैध परिवहन में लिप्त वाहनों को तुरंत जब्त किया जाए। मुरैना में कार्रवाई होने के बाद, अब यही चुनौती श्योपुर प्रशासन के सामने खड़ी है। माफियाओं का यह पलायन साबित करता है कि वे अभी भी कानून को चुनौती देने के लिए सक्रिय हैं।

​निगरानी बढ़ाना अत्यंत जरूरी

जानकारों का मानना है कि यदि प्रशासन ने तुरंत श्योपुर के घाटों पर अपनी निगरानी नहीं बढ़ाई, तो चंबल नदी के पारिस्थितिक तंत्र (ecosystem) को और अधिक नुकसान हो सकता है। स्थानीय निवासियों में भी माफियाओं के बेखौफ होकर सड़कों पर तेज रफ्तार ट्रैक्टर दौड़ाने से सुरक्षा का डर बना हुआ है। 

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