सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि वह मणिपुर में 2023 की जातीय हिंसा से जुड़े आपराधिक मामलों की दैनिक सुनवाई के लिए विशेष निचली अदालतों की स्थापना पर विचार कर रहा है।
नई दिल्ली [भारत]: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि वह मणिपुर में 2023 की जातीय हिंसा से जुड़े आपराधिक मामलों की दैनिक सुनवाई के लिए विशेष निचली अदालतों की स्थापना पर विचार कर रहा है। साथ ही जांच एजेंसियों को लंबित मामलों की जांच में तेजी लाने का निर्देश दिया है।
राज्य सरकार को जांच एजेंसियों की मदद के निर्देश
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और वी. मोहन की पीठ ने मणिपुर सरकार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और विशेष जांच टीमों (एसआईटी) को सभी आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि जांच एजेंसियों ने जांच आगे बढ़ाने में कई बाधाओं की जानकारी दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिया विशेष अदालतों का सुझाव
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा, "हम मणिपुर राज्य और मणिपुर एवं गुवाहाटी हाईकोर्ट की सहमति से विशेष अदालतों के गठन का अस्थायी प्रस्ताव करते हैं, ताकि मामलों की दैनिक आधार पर सुनवाई की जा सके।" पीठ को बताया गया कि एसआईटी आठ जिलों में मणिपुर हिंसा से जुड़े 3,020 मामलों की जांच कर रही है। इनमें से 301 मामलों में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है, 41 मामलों में आरोप तय हो चुके हैं और केवल 10 मामलों में ही सुनवाई शुरू हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी गौर किया कि अभियोजन पक्ष इन मामलों में 2,924 गवाहों से पूछताछ करने का प्रस्ताव रखता है।
CBI ने जांच की स्थिति बताई
सीबीआई ने अदालत को बताया कि उसे सौंपे गए 31 मामलों में से 21 में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। एजेंसी के अनुसार, 11 मामलों में पूरक जांच जारी है, जबकि छह मामलों में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की जा चुकी है। इनमें से तीन को संबंधित अदालत ने स्वीकार कर लिया है। चार मामले अभी भी जांच के अधीन हैं।
जांच में आ रही हैं कई व्यावहारिक मुश्किलें
सीबीआई ने राज्य में कानून-व्यवस्था की नाजुक स्थिति का हवाला देते हुए बताया कि बड़ी संख्या में गवाहों के विस्थापित होने के कारण बयान दर्ज करना और पूछताछ करना चुनौतीपूर्ण रहा है। वकीलों ने अदालत को यह भी बताया कि लंबे समय तक इंटरनेट बंद रहने से डिजिटल साक्ष्य जुटाने में दिक्कत हुई, जबकि आवागमन पर प्रतिबंधों ने हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में जमीनी जांच को प्रभावित किया।
'जांच अनिश्चितकाल तक नहीं चल सकती'
इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसियों को वास्तविक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन जांच अनिश्चितकाल तक नहीं चल सकती और इसे उचित समय सीमा के भीतर पूरा किया जाना चाहिए। अदालत ने मणिपुर के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को जांच एजेंसियों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने और आवश्यक अतिरिक्त प्रशासनिक एवं लॉजिस्टिक सहयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही अदालत ने जांच की प्रगति पर नई रिपोर्ट मांगी और लंबित तथा चार्जशीट दाखिल किए गए सभी मामलों का विवरण प्रस्तुत करने को कहा।
लापता लोगों के मामले पर भी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने करीब 30 लोगों के लापता होने के मामले में सीबीआई जांच की मांग करने वाली अंतर्राष्ट्रीय मेइतेई संगठन की याचिका पर भी विचार किया। अदालत ने आवेदकों को मणिपुर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से संपर्क करने का निर्देश दिया, ताकि मामले को एसआईटी या किसी अन्य उपयुक्त मंच को सौंपने पर विचार किया जा सके।
ANI
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