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सीवेज टेंडर गड़बड़ी में 6 गिरफ्तारियाँ

सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट टेंडर में गड़बड़ी का आरोप, सत्येंद्र जैन समेत 6 गिरफ्तार

दिल्ली के एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने मंगलवार को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के टेंडरों में गड़बड़ी के मामले में केजरीवाल सरकार के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन समेत 6 लोगों को गिरफ्तार किया है।

सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट टेंडर में गड़बड़ी का आरोप सत्येंद्र जैन समेत 6 गिरफ्तार

Six Arrested in Sewage Tender Irregularities |

दिल्ली: दिल्ली के एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने मंगलवार को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के टेंडरों में गड़बड़ी के मामले में केजरीवाल सरकार के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन समेत 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। जैन के अलावा दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व CEO उदित प्रकाश राय की भी गिरफ्तारी हुई है। आरोप है कि राय को ₹1.52 करोड़ की रिश्वत दी गई।

टेंडर में खास कंपनी को फायदा पहुंचाने का आरोप

ACB का आरोप है कि ट्रीटमेंट प्लांट के टेंडरों की शर्तें इस तरह बनाई गई थीं कि एक खास कंपनी को फायदा मिल सके। ACB की जांच अभी जारी है। जैन, उदित प्रकाश के अलावा दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व कॉन्ट्रैक्चुअल कंसल्टेंट अंकित श्रीवास्तव, कंपनियों के मालिक नागेंद्र यादव, राजा कुमार कुर्रा, पंकज वर्मा को अरेस्ट किया गया है।

मनी लॉन्ड्रिंग केस में 872 दिन जेल में रहे जैन

सत्येंद्र जैन अक्टूबर 2024 में तिहाड़ से बाहर आए थे। वे मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 872 दिन से जेल में थे। उन्हें ED ने 30 मई 2022 को गिरफ्तार किया था। इस मामले में ED ने मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया था। 18 अक्टूबर 2024 को दिल्ली की अदालत ने उन्हें जमानत दी थी।

STP टेंडरों में ₹17.70 करोड़ के कथित मनी लॉन्ड्रिंग का मामला

ED के मुताबिक, दिल्ली जल बोर्ड के चार सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) टेंडर में कथित अनियमितताएं हुईं। एजेंसी ने आरोप लगाया कि टेंडर की शर्तें इस तरह बनाई गईं कि एक खास कंपनी को फायदा मिले। इस मामले में ED ने दिसंबर 2025 में सत्येंद्र समेत 14 लोगों के खिलाफ करीब ₹17.70 करोड़ के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चार्जशीट दाखिल की थी। जैन पर यह केस 11 मई 2024 को दर्ज किया गया था।

इलेक्ट्रॉनिक सबूत मिलने का ACB का दावा

ACB के मुताबिक, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स के अपग्रेडेशन के लिए जारी टेंडर की शर्तों को इस तरह बदला गया, जिससे एक खास कंपनी फायदा पहुंचाया जा सके। ऐसी शर्तें जोड़ी गईं, जिससे व्यावसायिक कंपीटीशन खत्म हो जाए। एजेंसी ने कहा कि इससे सरकारी खजाने को भी नुकसान पहुंचा। ACB को जांच के दौरान बिचौलियों और सरकारी अधिकारियों के बीच हुई बातचीत के इलेक्ट्रॉनिक सबूत मिले। ई-मेल जांच में पता चला कि टेंडर के दस्तावेज कंपनियों से पहले ही शेयर हुए थे।

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