मंडला। विश्व प्रसिद्ध कान्हा टाइगर रिजर्व के मुक्की परिक्षेत्र (Mukki Range) से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है..
कान्हा टाइगर रिजर्व के मुक्की परिक्षेत्र में छठे बाघ की मौत, फेफड़े में संक्रमण |
मंडला। विश्व प्रसिद्ध कान्हा टाइगर रिजर्व के मुक्की परिक्षेत्र (Mukki Range) से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। मंगलवार सुबह वन विभाग की टीम को गश्त के दौरान एक और बाघ मृत अवस्था में मिला है। शुरुआती जांच में मौत का कारण फेफड़ों में गंभीर संक्रमण (Lung Infection) और केनाइन डिस्टेंपर वायरस (Canine Distemper Virus - CDV) बताया जा रहा है। इस मौत के साथ ही कान्हा रिजर्व में पिछले एक महीने के भीतर दम तोड़ने वाले बाघों की कुल संख्या छह हो गई है।
अमाही बाघिन और चार शावकों का कुनबा खत्म
इससे पहले अमाही क्षेत्र की एक प्रसिद्ध बाघिन और उसके चार शावकों की मौत हो चुकी है। इस नई मौत के बाद अब उस पूरे कुनबे के साथ-साथ कुल छह बाघों की जान जा चुकी है। मुक्की परिक्षेत्र में मंगलवार सुबह जिस बाघ का शव बरामद हुआ है, वह लगभग 5 से 6 वर्ष का एक स्वस्थ नर (Male Tiger) था।
पशु चिकित्सकों ने जांच के लिए सैंपल एकत्रित किये
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के नियमों और प्रोटोकॉल के तहत पशु चिकित्सकों की टीम ने मृत बाघ का पोस्टमार्टम किया है। जांच के लिए विसरा (Bisera) और फोरेंसिक सैंपल एकत्र कर लैब भेज दिए गए हैं।
जानिए केनाइन डिस्टेंपर वायरस के बारे में
विशेषज्ञों और वन्यजीव अधिकारियों के अनुसार, यह जानलेवा संक्रमण केनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) के कारण फैल रहा है। यह एक बेहद संक्रामक और घातक वायरस है, जो आमतौर पर जंगलों के आसपास के गांवों में घूमने वाले आवारा और जंगली कुत्तों में पाया जाता है। जब बाघ इन संक्रमित कुत्तों का शिकार करते हैं या उनके संपर्क में आते हैं तो यह वायरस उनके शरीर में प्रवेश कर जाता है। यह वायरस सीधे बाघों के श्वसन तंत्र (Respiratory System), पाचन तंत्र और तंत्रिका तंत्र (Nervous System) पर हमला करता है, जिससे उनके फेफड़ों में भारी संक्रमण हो जाता है और अंततः उनकी मौत हो जाती है।
जानलेवा वायरस को फैलने से रोकने के प्रयास
एक ही महीने के भीतर 6 बाघों की मौत ने राष्ट्रीय स्तर पर वन्यजीव प्रेमियों और वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है। बाघों के इस तरह अचानक काल के गाल में समाने के बाद कान्हा प्रबंधन अलर्ट मोड पर है। संक्रमित इलाकों को सैनिटाइज करने और आस-पास के गांवों के कुत्तों की मॉनिटरिंग व उनके वैक्सीनेशन (टीकाकरण) की तैयारी की जा रही है ताकि इस जानलेवा वायरस को आगे फैलने से रोका जा सके।
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