West bengal : पश्चिम बंगाल में 2026 में होने वाले वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी की कवायद के तहत सत्तारुढ़ टीएमसी और उसकी प्रमुख विरोधी भाजपा
West bengal : पश्चिम बंगाल में 2026 में होने वाले वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी की कवायद के तहत सत्तारुढ़ टीएमसी और उसकी प्रमुख विरोधी भाजपा के बीच एक दूसरे के खिलाफ आमलोगों को रिझाने की होड़ में एक से एक अव्वल नारे पेश होने लगे हैं। भाजपा के प्रदेश नेतृत्व ने ममता सरकार और टीएमसी के खिलाफ एक नारा गढ़ा है – “बाचते चाई, बीजेपी ताई” (हिंदी – बचाना चाहते हैं, इसलिए भाजपा)। भाजपा के इस नारे के मुकाबले में टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव व सांसद ने नारा गढ़ा है – बीजेपी बाई” (हिंदी- भाजपा विदा)।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब नदिया जिले के ताहेरपुर में भाजपा की रैली में हिस्सा लेने 20 दिसंबर को कोलकाता आए तो रैली में कुहासा के कारण नहीं पहुंच पाए और उन्होंने कोलकाता एयरपोर्ट से ही टेलीफोन पर रैली को संबेधित किया। तब उन्होंने “बाचते चाई, बीजेपी ताई” नारा लगाया। भाजपा ने अब इसी नारे को अपना लिया है और अपने कार्यक्रमों में इसका इस्तेमाल करने लगी है। भाजपा ने एक और नारा गढ़ा – “सइबे ना आर बांग्ला” (हिंदी – बंगाल बर्दास्त नहीं करेगा) लेकिन प्रधानमंत्री मोदी को “बाचते चाई, बीजेपी ताई” को ही पसंद किया।
टीएमसी के भी दो नारे हैं। “बीजेपी बाई” है ही, दूसरा नारा है – “मानबो ना हार, मां-माटी-मानुषेर सरकार आबार” (हिंदी – हार नहीं मानेंगे, मां-माटी-मानुष की सरकार फिर से)। लेकिन टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भाजपा के नारे के मुकाबले “बीजेपी बाई” को ही धारदार माना है और उन्होंने पार्टी के नेताओं के साथ राज्यस्तरीय बैठक में इसी नारे के इस्तेमाल पर जोर दिया है, लेकिन दूसरे नारे का भी इस्तेमाल होगा।
पिछले विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने “बांग्ला नीजेर मेये के चाय” ( हिंदी -- बंगाल अपनी कन्या को चाहता है) नारे का इस्तेमाल किया था और जीत हासिल की थी। टीएससी नेता मान रहे हैं कि इस बार का विधानसभा चुनाव महत्वपूर्ण युद्ध है। इस युद्ध में भाजपा को हराकर उसे विदा करना है।
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