MP News : बालाघाट। ज़िले के लांजी थाना क्षेत्र के अंतर्गत घोटी–नंदोरा गाँव में 10 मुस्लिम परिवारों के कथित सामाजिक बहिष्कार का एक गंभीर मामला सामने आया है।..
MP News : बालाघाट। ज़िले के लांजी थाना क्षेत्र के अंतर्गत घोटी–नंदोरा गाँव में 10 मुस्लिम परिवारों के कथित सामाजिक बहिष्कार का एक गंभीर मामला सामने आया है। कहा जा रहा है कि यह बहिष्कार जनवरी में आयोजित एक हिंदू सम्मेलन में दिए गए बयानों के बाद शुरू हुआ, जहाँ कथित तौर पर मुस्लिम समुदाय से सभी सामाजिक और आर्थिक संबंध पूरी तरह तोड़ने की अपील की गई थी।
रोजी-रोटी व दैनिक जीवन पर असर
प्रभावित परिवारों के अनुसार, सम्मेलन में ग्रामीणों से कहा गया कि वे मुसलमानों के साथ खाना-पीना, लेन-देन और किसी भी प्रकार का संपर्क बंद कर दें, और अपनी सभी दैनिक ज़रूरतें केवल हिंदू समुदाय के सदस्यों से ही पूरी करें। इसके बाद से गाँव का माहौल पूरी तरह बदल गया है, जिसका सीधा असर मुस्लिम निवासियों की रोज़ी-रोटी और दैनिक जीवन पर पड़ा है।
ड्राइवर की नौकरी गई, इलेक्ट्रीशियन एक हफ्ते से बेरोज़गार
कथित बहिष्कार के कारण स्कूल बस चालक आसिफ हुसैन को बस चलाने से रोक दिया गया है, जबकि इलेक्ट्रीशियन सादिक हुसैन को पिछले सात दिनों से कोई काम नहीं मिल रहा, क्योंकि लोग उन्हें काम पर रखने से इनकार कर रहे हैं। गाँव की स्थानीय महिला खैरुन निशा अपने परिवार के साथ गंभीर परेशानियों का सामना कर रही हैं।
मुनादी कर बहिष्कार की घोषणा का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि किराना दुकानदार मुस्लिम परिवारों को ज़रूरी सामान बेचने से मना कर रहे हैं, वहीं नाइयों ने उनके बाल काटने और दाढ़ी बनाने से इनकार कर दिया है। यह भी दावा किया गया है कि गाँव के कोटवार (मुनादी करने वाले) के ज़रिए सार्वजनिक रूप से सामाजिक बहिष्कार की घोषणा करवाई गई।
“ऐसा माहौल हमने पहले कभी नहीं देखा” - स्थानीय महिला
खैरुन निशा ने बताया कि वे सम्मेलन में दिए गए बयानों को लेकर अन्य लोगों से बात करने गई थीं। उन्होंने कहा कि गाँव में पहले कभी ऐसा माहौल नहीं रहा और सभी समुदायों के लोग शांति से साथ रहते थे। अब बहिष्कार के कारण परिवारों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि बच्चे स्कूल जाने से डर रहे हैं और महिलाएँ भय के माहौल में जीने को मजबूर हैं।
पूर्व विधायक ने लगाया नफ़रत फैलाने का आरोप, जांच की मांग
पूर्व विधायक किशोर समरीते ने कथित सामाजिक बहिष्कार पर कड़ा विरोध किया है और कहा कि यह संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बताया है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्रालय से जांच, दोनों गाँवों में पुलिस फ्लैग मार्च और पूरे मामले की न्यायिक जाँच की माँग की है।
समरीते ने आरोप लगाया कि गाँव के सरपंच, सचिव और ब्लॉक व ज़िला पंचायत के सदस्य बहिष्कार का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि मंदिरों और सार्वजनिक स्थलों पर धार्मिक झंडे लगाकर नफ़रत भरे भाषण दिए जा रहे हैं, और इतनी गंभीर घटना के बावजूद पुलिस और खुफिया एजेंसियाँ चुप्पी साधे हुए हैं।
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